गांधी नगर संस्था में गड़बड़ी के मामले में सहकारिता उपायुक्त गजभिये और उप अंकेक्षक सेठिया पर होगी कार्रवाई, संयुक्त आयुक्त ने कार्रवाई के लिए भेजा प्रतिवेदन

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इंदौर। गांधी नगर गृह निर्माण संस्था में गड़बड़ियों के मामले में सहकारिता उपायुक्त मदन गजभिये, उप अंकेक्षक आशीष सेठिया और संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडेय की मुसीबत बढ़ती जा रही है। लोकायुक्त में शिकायत के बाद अब संयुक्त आयुक्त सहकारिता इंदौर संभाग बी.एल. मकवाना ने आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्यप्रदेश को तीनों पर कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा है।

उल्लेखनीय है कि गांधी नगर गृह निर्माण संस्था में सालों से कई गड़बड़ियों की शिकायत हुई है। सहकारिता विभाग इसकी जांच करता रहता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। बताया जाता है कि पिछले 15 सालों से संस्था का ऑडिट भी नहीं हुआ और प्लॉटधारक परेशान घूमते रहते हैं। संस्था में हुई गड़बड़ियों की शिकायत एक सदस्य सत्यनारायण मूलचंद अग्रवाल ने लोकायुक्त से की थी। वर्ष 2020 में इस शिकायत की जांच तत्कालीन अंकेक्षण अधिकारी जी.एस. परिहार द्वारा की गई। उन्होंने 425 पेज का जांच प्रतिवेदन दिया। इस पर उपायुक्त मदन गजभिये को कार्रवाई करनी थी, लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद गजभिये ने उप अंकेक्षक आशीष सेठिया को कार्रवाई के लिए भेजा।

जांच करने गए और कर लिया तीन प्लॉटों का सौदा

शिकायतकर्ता सत्यनारायण अग्रवाल ने बताया कि आशीष सेठिया जब जांच करने पहुंचे तो उन्होंने गांधी नगर संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडेय से सौदेबाजी कर ली। तीन प्लॉट देने की बात पर सौदा पक्का हुआ। सेठिया ने कहा कि तीन प्लॉटों के बदले सही जांच रिपोर्ट दे दूंगा। इस सौदेबाजी की रिकॉर्डिंग अग्रवाल के पास आ गई। उन्होंने फिर इसकी शिकायत कर दी। अब इसी शिकायत पर कार्रवाई आगे बढ़ी है।

सेठिया ने अपने भाइयों को जारी कर दीं रसीदें

संयुक्त आयुक्त मकवाना द्वारा 16 जुलाई को भेजे अपने प्रतिवेदन में लोकायुक्त में शिकायत के आधार पर तीन बिंदुओं पर इन तीनों पर कार्रवाई के लिए कहा गया है। पहला बिंदु है तत्कालीन अंकेक्षण अधिकारी जीएस परिहार द्वारा म.प्र.सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 की धारा 59 के तहत प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर कार्रवाई की मांग, जिसमें भारी गड़बड़ी पाई गई है। दूसरा बिंदु है जांच प्रतिवेदन में कार्यवाही में देरी की जांच कर इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई। तीसरा बिंदु है संस्था के अभिलेख थाने में वर्ष 2013 से जमा होने के बाद भी आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक के दोनों भाइयों के नाम रसीदें जारी की गई हैं। सेठिया ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नई रसीदें खरीदकर अपने दोनों भाइयों को 2014 में रसीदें जारी कर दीं।

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