बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद की नई टीम बनाने में जुटे लालू, 6 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदले

Date:

पटना। बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव है। सारे दल तैयारियों में जुटे हुए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू यादव चुनाव के लिए नई टीम बना रहे हैं। इसी के तहत पार्टी के छह प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदले गए हैं। आने वाले दिनों में और भी कई बदलाव होंगे।

उल्लेखनीय है कि 5 जुलाई को लगातार 13वीं बार लालू यादव राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। उन्होंने अपनी नई टीम की घोषणा से विभिन्न प्रकोष्ठों से शुरू कर दी है। महिला प्रकोष्ठ की कमान पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांति सिंह को सौंपी गई है। युवा प्रकोष्ठ का नेतृत्व सांसद अभय कुशवाहा करेंगे। अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के रूप में पूर्व केन्द्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रकोष्ठ का प्रभार बिहार सरकार के पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम को दिया गया है। किसान प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद सुधाकर सिंह को बनाया गया है, वहीं छात्र प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी प्रोफेसर नवल किशोर संभालेंगे।

हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास

ताजी नियुक्तियों में सामाजिक समीकरण का विशेष ख्याल रखा है। महिला, युवा, छात्र, अल्पसंख्यक, किसान और दलितआदिवासी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। राजद की तरफ से सीएम फेस तेजस्वी यादव ही रहेंगे। उनके पास महागठबंधन कोऑर्डिनेशन कमिटी के अध्यक्ष की भी जम्मेदारी है और सारे बड़े फैसले वही लेते हैं।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

आपको याद होगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में अमित शाह को क्या कहा था? प्रियंका ने कहा था-गृह मंत्रीजी हंस रहे हैं। सारी तैयारी पहले से कर ली है। चाणक्य भी जिंदा होते तो आश्चर्य में पड़ जाते। प्रियंका के कहने का मतलब था कि पूरा विपक्ष आपकी चालाकी को समझ चुका है। और हुआ यही, इस बार विपक्ष ने चाणक्य की चालाकी चलने नहीं दी। भले ही विपक्ष भाजपा पर इस बिल के माध्यम से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का आरोप लगा रही है, लेकिन हम नहीं मानते। इसके बावजूद विपक्ष ही नहीं आम जनता के मन में यह सवाल है कि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के बीच ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस बिल को लाने की क्या जरूरत थी? चलो यह भी मान लिया कि बिल लाना जरूरी था, फिर पूरे देश में नारी शक्ति वंदन कैंपेन क्यों चलाया जा रहा था। भाजपा हर जिले, गांव-कस्बे में यह आयोजन कर रही थी और सारे वरिष्ठ नेता नारी शक्ति बिल का गुणगान कर रहे थे। चुनाव सभाओं में भी इसका जमकर इस्तेमाल किया गया। विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा था कि महिला आरक्षण विधेयक साल 2023 में ही पारित हो चुका है, फिर इसकी जरूरत क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक फुल कॉन्फिडेंस में थे कि इस बार यह बिल जरूर पास होगा। जब सारे हथियार फेल हो गए तो पीएम मोदी ने बिल पर मतदान से पहले एक अपील की-मैं सभी सांसदों से कहूंगा... आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ...। आप में से बहुतों को याद होगा कि पूर्व प्रधानमंत्री बीपी सिंह ने मंडल कमीशन के समय भी संसद में ऐसी ही अपील की थी, लेकिन विपक्ष सरकार की मंशा को समझ गया था और सरकार की हार हुई थी। आपने महिला आरक्षण बिल की शर्त में लिखा कि आरक्षण तभी लागू होगा जब अगली जनगणना और उसके बाद सीटों का 'परिसीमन' होगा। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के दलों ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन करके एक राजनीतिक साजिश रचने की कोशिश कर रही है। माना कि आप राजनीति के चाणक्य हैं, लेकिन यह भी सच है कि चाणक्य दोबारा पैदा नहीं हो सकते… और यह भी सच है कि अगर आप चाणक्य जैसे भी होते तो इस बिल के गुब्बारे में इतनी हवा नहीं भरते…