14 साल के वनवास के बाद मिली पोस्टिंग पचा नहीं पा रहीं डिंडौरी कलेक्टर नेहा मारव्या, अब सरकार ने उनके मनमाने ट्रांसफर आदेश पर लगाई रोक

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भोपाल। 14 साल तक लूप लाइन में रहने के बाद बड़ी मुश्किल से आईएएस नेहा मारव्या को पहली बार डिंडौरी में कलेक्टर की पोस्टिंग मिली, लेकिन यह उन्हें हजम नहीं हो रहा। अभी कुछ समय पहले ही उन्होंने कलेक्टर कार्यालय परिसर में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश निकाला था। बाद में जब विरोध हुआ तो इसे वापस ले लिया। अब ताजा विवाद जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित स्कूलों और छात्रावासों में किए गए मनमाने तबादलों का है। इस पर इतना हंगामा मचा कि सरकार को कलेक्टर के आदेशों पर रोक लगाना पड़ा।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक माह से जिले में तबादला विरोध की आवाजें उठ रही थीं। जनजाति कार्य विभाग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्कूलों और छात्रावासों के करीब 200 शिक्षकों को हाईकोर्ट से स्थगन आदेश भी मिल चुका था। अब शासन स्तर से जारी निर्देश के अनुसार 438 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण रद्द कर दिया गया है। कलेक्टर द्वारा किए गए तीन प्राचार्यों के स्थानांतरण को भी शासन ने नियम विरुद्ध मानते हुए खत्म कर दिया है। यह तबादले स्थानांतरण नीति 2025 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसी तरह 12 उच्च माध्यमिक शिक्षकों के तबादले भी अवैध मानकर रद्द कर दिए गए हैं। 11 जुलाई 2025 को जारी आदेश में 139 छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना की गई थी। इसमें भी अनियमितताएं सामने आने पर शासन ने इसे निरस्त कर दिया है। अधीक्षकों की जिम्मेदारी अब 16 मार्च 2015 के निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी।

विधायक ने भी कलेक्टर के आदेश का किया था विरोध

कलेक्टर के आदेश पर शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने प्रेस कान्फ्रेंस कर विरोध जताया। उन्होंने इन तबादलों को शिक्षकों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि जनजाति कार्य विभाग का निर्णय समयानुकूल और न्यायसंगत है। विधायक धुर्वे ने कहा कि जिला स्तर पर मनमाने तबादलों से शिक्षक ही नहीं, बल्कि स्कूलों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। लगातार किए गए तबादलों से शिक्षा व्यवस्था अस्तव्यस्त हो रही थी। उन्होंने जनजाति कार्य विभाग से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा बने।

बड़ी मुश्किल से मिली है कलेक्टर की कुर्सी

वर्ष 2011 बैच की आईएएस नेहा मारव्या सिंह को प्रदेश सरकार ने 14 साल कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंचने नहीं दिया था, जबकि वर्ष 2015 बैच के अफसरों भी कलेक्टर बनाया जाने लगा था। शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने भी उन पर तरस नहीं खाया, लेकिन मोहन सरकार को उन पर दया गई। यह दया तब आई जब आईएएस सर्विस मीट के पहले दिन आईएएस आफिसर्स एसोसिएशन के ग्रुप में नेहा ने अपना दर्द लिखकर जाहिर किया था। इसके बाद मोहन सरकार ने मेहरबानी कर दी और 14 साल बाद जनवरी 2025 में उन्हें डिंडोरी का कलेक्टर बना दिया।

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