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इंदौर। आज इंदौर शहर में मात्र डेढ़ घंटे में हुई दो इंच बारिश ने नगर निगम के सारे दावों की पोल खोल कर रख दी। गलियों और मोहल्लों की तो बात ही छोड़ दें, मुख्य सड़कें नदियां बन गई थीं। गाड़ियां बह रही थीं। पानी में डूबकर बंद भी हो रही थीं। लोग परेशान थे। ट्रैफिक जाम लगा सो अलग। ऐसे समय लोग अपने मित्र यानी पुष्यमित्र भार्गव को ढूंढ रहे थे, लेकिन उनका पता-ठिकाना नहीं मिल रहा था। वह तो उन्होंने एक फोटो शेयर किया तो पता चला कि वे तो इंदौर नगर निगम की विकास गाथा सीएम डॉ.मोहन यादव को सुनाने भोपाल गए हैं।
अरे, पहले साल तो लोगों ने क्षमा कर दिया कि हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता हैं, समझने में थोड़ा टाइम लगेगा। लेकिन, अब तो तीन साल हो गए। न शहर को समझ पाए और न शहर के लोगों को कुछ समझ रहे। न किसी की सुनना, न किसा का कोई काम करना। जो अपने आप हो गया, उसका श्रेय लेकर सीना ताने घूमते रहना।
लोग पूछ रहे हैं, इस बार क्यों हो रहा ऐसा
मित्र, निचली बस्तियों की बात नहीं कर रहे, पॉश कॉलोनी के लोग भी अपने घरों से पानी निकालते हुए आपसे सवाल कर रहे हैं कि आखिर इस बार ऐसा क्या हो गया? क्या आपकी नगर निगम ने इंदौर के पानी निकासी के सारे रास्ते बंद करा दिए या फिर नालियों की सफाई नहीं कराई? आप नाला टैपिंग से लेकर पाइप लाइन डालने तक तो कई बार सड़कें खोद चुके हैं, फिर पानी निकासी की व्यवस्था को लेकर क्या हुआ?
कान्ह-सरस्वती को कोसने से नाराज तो नहीं
लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि लगता है मित्र कान्ह और सरस्वती की सफाई को लेकर कोसे जाने से नाराज हैं। अब कान्ह और सरस्वती तो नाव चलाने लायक हुई नहीं तो मित्र ने सोचा कि जलनिकासी की ऐसी व्यवस्था कर दो कि लोग अपने मोहल्ले की सड़कों पर ही नदियों का मजा लेने लगें।
जलजमाव के कई नए ठिकाने बनाए
शहर के लोग इस बात से भी आश्चर्य में हैं कि हर साल जहां तेज बारिश के बाद भी पानी नहीं जमा होता था, वहां भी आज तालाब बना दिखा। कई सड़कें और पुल-पुलियाएं ऐसी दिखीं जहां पहली बार पानी जमा हुआ है। अब कर्बला के पास वाले पुल की ही बात कर लें। महू नाके से कलेक्टर ऑफिस जाने वाले हिस्सा तो निचला है, वहां तालाब बनना समझ आता है, लेकिन नए वाले ऊंचे पुल के दोनों तरफ नदी जैसा बहाव देख लोग आश्चर्य में थे। पलसीकर सहित कई इलाकों में वर्षों से पानी जमा होता है, लेकिन अब तक उसकी निकासी की व्यवस्था नहीं हो पाई।
बुरा न मानो मित्र, क्या राजनीति छोड़ रहे हो
नगर निगम की समस्याओं से त्रस्त जनता आपसे एक सवाल पूछ रही है कि क्या आप राजनीति छोड़ने वाले हो? लेकिन, आपने तो चार नंबर विधानसभा के लिए अभी से प्रयास शुरू कर दिए हैं? बड़े-बड़े बल्लमों को पटकनी देने की कला आपने सीख ली है। ऐसे में नहीं लगता कि राजनीति का स्वाद आपको कड़वा लग रहा है। फिर भी इतना याद रखना मित्र कि अगर आम जनता त्रस्त है तो हर बार भाजपा का निशान काम नहीं आने वाला। इसलिए एक सलाह है कि अगर राजनीति में ही रहना चाहते हो तो थोड़ा ध्यान शहर और जनता पर भी दो दो। बाकी आप काफी समझदार हो।



