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चीन की घटती जनसंख्या: जिनपिंग सरकार के सामने बड़ी चुनौती
चीन की जनसंख्या में लगातार गिरावट तीसरे साल भी जारी रही। साल 2024 के अंत तक देश की आबादी घटकर 1.408 अरब रह गई, जो पिछले साल की तुलना में 13 लाख कम है। यह गिरावट चीन की जन्म दर में भारी कमी का परिणाम है और जिनपिंग सरकार के लिए गहरी चिंता का कारण बन गई है।
जनसंख्या गिरावट के मुख्य कारण:
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वन चाइल्ड पॉलिसी का असर: दशकों पहले लागू की गई इस नीति ने जनसंख्या वृद्धि को धीमा कर दिया।
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बढ़ती जीवन लागत: युवा नौकरी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित हैं, जिससे शादी और बच्चे पैदा करने में देरी हो रही है।
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वृद्ध आबादी में वृद्धि: चीन में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग आबादी का 22% हिस्सा हैं, जो 2035 तक 30% तक पहुंचने की उम्मीद है।
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लिंग असंतुलन: देश में हर 100 महिलाओं पर 104 पुरुष हैं, जिससे सामाजिक संरचना प्रभावित हो रही है।
सरकार की कोशिशें:
चीन ने मई 2021 में तीन बच्चों की नीति लागू की और प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की। इसके तहत, दूसरे और तीसरे बच्चे के जन्म पर आर्थिक सहायता और अन्य लाभ दिए जा रहे हैं। लेकिन इन उपायों का अब तक खास असर नहीं हुआ है।
भारत बना सबसे ज्यादा आबादी वाला देश
चीन की घटती जनसंख्या के बीच, भारत ने 142.86 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश का दर्जा हासिल कर लिया है। वहीं, चीन की आबादी अब 140 करोड़ पर आ गई है।
शहरीकरण का प्रभाव
चीन में 10 मिलियन से अधिक लोग शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं, जिससे शहरीकरण की दर बढ़कर 67% हो गई है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों की आबादी तेजी से घटने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
भविष्य की चुनौतियां
जनसंख्या में गिरावट से चीन की आर्थिक और सामाजिक संरचना पर गहरा असर पड़ रहा है। कामकाजी उम्र की जनसंख्या घट रही है, जबकि वृद्ध लोगों की देखभाल और पेंशन व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
चीन के लिए जनसंख्या स्थिरता बनाए रखना अब एक प्रमुख चुनौती बन गई है। सरकार को अधिक प्रभावी योजनाओं और नीतियों की जरूरत है, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके।
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