अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे से ठीक पहले बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वाशिंगटन नई दिल्ली को उतनी ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है, जितनी भारत खरीदना चाहता है। उन्होंने भारत को अमेरिका का मजबूत सहयोगी और भरोसेमंद साझेदार बताया।
मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश कई अहम मुद्दों पर मिलकर शानदार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका आगामी भारत दौरा बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।
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रुबियो ने कहा, “हम भारत के साथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह यात्रा बेहद अहम है और मुझे खुशी है कि हम यह दौरा कर रहे हैं, क्योंकि हमारे बीच बातचीत के लिए कई महत्वपूर्ण विषय हैं।”
उन्होंने बताया कि इस दौरे के दौरान उन्हें चार देशों के समूह की बैठक में भी शामिल होने का मौका मिलेगा। रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बड़ी बैठक भी इसी समूह के साथ हुई थी और अब भारत में दोबारा यह बैठक होना बेहद खास है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस दौरान एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भी अगले सप्ताह भारत आने वाली हैं। इस यात्रा में भारत को तेल आपूर्ति बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भारत द्वारा वेनेजुएला से तेल खरीदने का मुद्दा उठा चुके हैं। उसी दौरान दोनों देशों के बीच एक अहम व्यापार समझौता भी हुआ था, जिसके तहत भारतीय आयात पर शुल्क दर को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था।
मार्को रुबियो 23 मई से 26 मई तक भारत के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह नई दिल्ली, कोलकाता, आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे। खास बात यह है कि लगभग 14 वर्षों बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता पहुंच रहा है। इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कोलकाता का दौरा किया था।
दौरे के अंतिम दिन 26 मई को चार देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। बैठक में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु भी शामिल होंगे।



