यूरोप को चाहिए अपनी सेना: जेलेंस्की की म्यूनिख से जोरदार अपील

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यूरोप को चाहिए अपनी सेना: जेलेंस्की की म्यूनिख से जोरदार अपील

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों से एकजुट होकर एक संयुक्त सेना बनाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका यूरोप के मुद्दों पर अपना समर्थन वापस ले सकता है, जिससे पूरे महाद्वीप की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

रूस से बड़ा खतरा, यूरोप को सतर्क रहना होगा

जेलेंस्की ने दावा किया कि उनकी खुफिया एजेंसी को जानकारी मिली है कि रूस इस गर्मी में यूरोप पर हमले की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि यूरोप अपनी सशस्त्र सेना बनाए। हमें यह स्वीकार करना होगा कि अमेरिका हर स्थिति में हमारा समर्थन नहीं कर सकता।”

यूरोप को खुद की रक्षा नीति बनानी होगी

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप को एक समान विदेश और रक्षा नीति अपनानी होगी, जिससे वह अपनी सुरक्षा को लेकर आत्मनिर्भर बन सके। “यूरोप के पास संसाधन हैं, लेकिन उसे एकजुट होकर काम करने की जरूरत है ताकि कोई भी उस पर हुक्म न चला सके,” उन्होंने जोड़ा।

रूस बढ़ा रहा है सैन्य ताकत

जेलेंस्की ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी सेना में 150,000 नए सैनिक जोड़ रहे हैं, जो कई यूरोपीय सेनाओं से बड़ा आंकड़ा है। रूस में हर सप्ताह नए भर्ती केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे उसका सैन्य विस्तार तेजी से बढ़ रहा है।

बेलारूस बन सकता है युद्ध का नया मोर्चा?

यूक्रेनी खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक, रूस इस गर्मी में “प्रशिक्षण अभ्यास” के नाम पर बेलारूस में सेना भेजने की योजना बना रहा है। जेलेंस्की ने कहा कि यह यूरोपीय देशों के खिलाफ अभियान की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, नाटो सैन्य समिति के अध्यक्ष एडमिरल ग्यूसेप कैवो ड्रैगन ने कहा कि उनके पास अभी इस संबंध में कोई पुष्ट जानकारी नहीं है।

नाटो में शामिल होने का सपना कायम

अपने भाषण में जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को झूठा करार देते हुए कहा कि यूक्रेन कभी भी उसकी शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन का भविष्य उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में ही है, भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ इसके खिलाफ बयान दे चुके हों।

क्या यूरोप अपने भविष्य के लिए तैयार है?

जेलेंस्की की इस अपील के बाद अब सवाल उठता है—क्या यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए खुद की सेना बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएगा? आने वाले महीनों में इस पर यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

Abhilash Shukla (Editor)
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