अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को भी दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला जारी रहा, जबकि दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइफलाइन होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को लेकर चिंताएं और गहरा गई हैं।
अमेरिका का दावा है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ठिकानों सहित 90 सैन्य लक्ष्यों पर हमले किए। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि पिछले दो दिनों में अमेरिकी हमलों में 14 आम नागरिकों की मौत हुई है।
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ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के आसपास भी कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन हमलों को लेकर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत, बहरीन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। बाद में सरकारी समर्थन वाले मीडिया ने बताया कि ईरान ने कुवैत, जॉर्डन और इराक में भी कई स्थानों को निशाना बनाया।
इसी बीच, ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को छह दिनों तक चले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के बाद सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उत्तर-पूर्वी ईरान के मशहद शहर में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर भी थे, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ धमकी भरे संदेश लिखे हुए थे।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के शुरुआती हमलों के दौरान हुई थी।
आपकी राय क्या है? क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, या कूटनीति से हालात संभल जाएंगे? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।



