उपराष्ट्रपति चुनाव में क्या भाजपा फिर चौंकाएगी, अगर दलित चेहरा लाया गया तो मध्यप्रदेश का लग सकता है नंबर

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नई दिल्ली। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव होना है। मोहरे बिछ गए हैं। विपक्ष भी जोर लगा रहा है और भाजपा एक बार फिर चौंकाने की कोशिश में जुट गई है। उपराष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर कई नामों पर चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि भाजपा इस बार किसी दलित चेहरे पर दांव लगा सकती है, अगर ऐसा हुआ तो मध्यप्रदेश का नंबर लग सकता है। बताया जा रहा है कि दलित चेहरों की रेस में मध्यप्रदेश वरिष्ठ नेता और वर्तमान में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत का नाम सबसे आगे है।

भाजपा की तरफ से नाम तय करने के लिए पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक रविवार शाम को पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय पर बुलाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा,गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित रहेंगे। इससे पहले 7 अगस्त को एनडीए नेताओं की संसद भवन में हुई बैठक में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा को अधिकृत किया गया था। इसके बाद से बड़े नेताओं के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। शुक्रवार रात को भी इसी मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की।

संघ की पसंद का रखा जाएगा ध्यान

यह तो लगभग तय हो गया है कि उपराष्ट्रपति भाजपा से ही होगा, क्योंकि एनडीए के अन्य घटक दलों के लिए संघ की रजामंदी नहीं है। संघ चाहता है कि इससे क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन भी साधा जाए। वर्तमान में राष्ट्रपति आदिवासी हैं जो पूर्वी भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रधानमंत्री पद पर ओबीसी हैं, जो पश्चिम और उत्तर दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में दक्षिण या मध्य क्षेत्र से उम्मीदवार तय हो सकते हैं।

फिलहाल गेहलोत का नाम सबसे आगे

भाजपा और संघ में इस बार किसी दलित चेहरे को उपराष्ट्रपति बनाने पर मंथन चल रहा है। ऐसे में सबसे बड़े दावेदार के रूप में मध्यप्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और वर्तमान में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत का नाम सबसे आगे है। गहलोत राज्यसभा में सदन के नेता भी रहे हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वे संसदीय बोर्ड के सदस्य भी रह रहे हैं। मध्यप्रदेश और दलित समुदाय से आने के कारण वे क्षेत्रीय जातीय समीकरण में भी वे सबसे उपयुक्त माने जा रहे हैं।

हाल ही में इंदौर में संघ प्रमुख से मिले थे गेहलोत

उल्लेखनीय है कि हाल ही में जब संघ प्रमुख मोहन भागवत इंदौर आए थे तो थावरचंद गेहलोत ने उनसे एयरपोर्ट पर मुलाकात की थी। भागवत ने गेहलोत से पांच मिनट अलग से चर्चा की थी। इस मुलाकात के बाद भी यह तय माना जा रहा था कि गेहलोत के नाम पर मुहर लग सकती है। हालांकि भाजपा हमेशा चौंकाने की कोशिश करती रही है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि अंतिम समय में रविवार को क्या फैसला होगा, लेकिन गेहलोत की दावेदारी को अब तक प्रबल माना जा रहा है।

कई अन्य राज्यों के राज्यपाल भी लाइन में

उपराष्ट्रपति पद के लिए कई अन्य नाम भी चर्चा में हैं। इनमें गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना का नाम भी शामिल हैं। आरएसएस के प्रमुख विचारक शेषाद्रिचारी का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।

21 अगस्त को नामांकन की आखिरी तारीख

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 7 अगस्त को उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त है और 22 अगस्त को नामांकन की जांच होगी। उम्मीदवार 25 अगस्त तक नाम वापस ले सकते हैं। मतदान और मतगणना 9 सितंबर को होगी। एनडीए के उम्मीदवार का नामंकन आखिरी दिन 21 अगस्त को ही होना है।

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