जिला अध्यक्ष पर तो पेंच सुलझा, नगर अध्यक्ष पर अपने ही खेमे में फंसे मंत्रीजी, बेटे के मोह पर एक पुराना कार्यकर्ता दिख रहा भारी

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इंदौर। भाजपा जैसी अनुशासनत्मक और संगठनात्मक पार्टी में इस बार जिला अध्यक्ष के चुनाव में ऐसा पेंच फंसा की, इसके सारे सिद्धांत और नियम फेल नजर आ रहे हैं। बड़े नेताओं की लड़ाई में मामला इतना उलझा कि धीरे-धीरे कर अब तक 47 जिलों की सूची जारी हुई है। इंदौर में आज दिन भर जिला अध्यक्ष के लिए कवायद चलती रही, लेकिन नगर अध्यक्ष का का मामला अभी उलझा हुआ है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दिल्ली से वीटो पावर लगाकर जिले में अपने खास समर्थक चिंटू वर्मा को भंवर से निकाल लाए हैं। पहले वे सिर्फ नगर पर राजी हो गए थे, लेकिन अपने ही गुट में टसल देख चिंटू के नाम पर वे फिर अड़ गए। ऐसे में शहर के एक दूसरे मंत्री तुलसी सिलावट के साथ ही विधायक मनोज पटेल और उषा ठाकुर के उम्मीदवार अंतर दयाल जिला अध्यक्ष की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। बताया जा रहा है कि मंत्री विजयवर्गीय ने वरिष्ठ नेताओं के सामने यह बात कह दी कि जब प्रदेश में अन्य नेताओं के समर्थकों को जिलाध्यक्ष बनाया जा रहा है, तो उनके कहने पर दो पद क्यों नहीं। खास बात यह कि तुलसी सिलावट के उम्मीदवार अंतर दयाल के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कोशिश कर रहे थे। कहा तो यहां तक जा रहा है कि सिंधिया ने दयाल को बधाई भी दे दी थी।

नगर अध्यक्ष के लिए अपने ही खेमे में लड़ाई

अब मंत्रीजी अपने वीटो पावर से नगर अध्यक्ष का पद भी अपने कब्जे में करना चाहते हैं, लेकिन यहां पेंच अपने ही खेमे के नेताओं में फंस गया है। बेटे आकाश के दबाव में मंत्री विजयवर्गीय टीनू जैन को नगर अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, जबकि दो नंबर खेमे के ही विधायक रमेश मेंदोला सहित कई अन्य नेता सुमित मिश्रा के नाम पर अड़े हुए हैं। मंत्रीजी यह लड़ाई तो जीत जाएंगे, लेकिन उन्हें अपने ही खेमे को नाराज भी करना पड़ेगा। मंत्रीजी की जिद चली तो टीनू को मौका मिलेगा और अगर रमेश मेंदोला और अन्य नेताओं की चली तो सुमित मिश्रा को पद मिलना तय है।

टीनू के नाम पर दो नंबर खेमे में ही विरोध

उल्लेखनीय है कि रायशुमारी के बाद जब सूची भोपाल पहुंची तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नगर अध्यक्ष के लिए दीपक जैन टीनू के नाम की जिद पकड़ ली थी। हालांकि इसके लिए विधायक रमेश मेंदोला सहित अधिकांश नेता सुमित मिश्रा के नाम की सिफारिश कर रहे थे। फिर भी बेटे आकाश की जिद के कारण कैलाश विजयवर्गीय टीनू के नाम पर अड़े रहे। जैसे ही दो नंबर के ही दूसरे नेताओं को टीनू के नाम फाइनल होने की बात पता चली तो विरोध शुरू हो गया। रायशुमारी में भी सबसे ज्यादा लोगों ने सुमित मिश्रा का नाम दिया था। दो नंबर खेमे के नेताओं ने टीनू की शराब लॉबी से सांठगांठ का जिक्र करते हुए भी कई सवाल उठाए थे। कुछ नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि सुमित मिश्रा जो कि भाजपा के लिए 14 साल की उम्र से काम कर रहा है और हमेशा दो नंबर का वफादार रहा है, उसे छोड़ टीनू का साथ देना ठीक नहीं है।

अब हर हाल में पूरे शहर पर कब्जा

वर्तमान परिस्थितियों में नगर और जिला अध्यक्ष दोनों ही पद मंत्री गुट के पास जाते दिख रहे हैं। ऐसे में पूरे शहर पर एक बार फिर दो नंबर का कब्जा होता दिख रहा है। भाजपा के ही नेता कह रहे हैं कि इससे शहर का राजनीतिक संतुलन बिगड़ जाएगा। संतुलन बनाने की कोशिश भी शुरू हुई, लेकिन इसमें सफलता मिलती नहीं दिख रही।

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