मंत्रीजी, इसे श्रद्धा नहीं, नौटंकी कहते हैं, मंदिर नहीं सिनेमाहॉल था और वहां कुर्सियां खाली थीं

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इंदौर। राजनीति में नौटंकी करना कोई मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सीखे। पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रहे और आलाकमान की नजरों में खटक रहे मंत्रीजी का एक नया कारनामा चर्चा में है। इस बार मंत्रीजी ने संघ के पदाधिकारियों में अपना नंबर बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन लोग इसे फुल नौटंकी बता रहे हैं।

दरअसल संघ के सौ साल पूरे होने पर फिल्म शतक बनी है। इसे मध्यप्रदेश में टैक्स फ्री भी कर दिया गया है और भाजपा के मंत्री, विधायक, नेता और कार्यकर्ता इसे देखने जा रहे हैं। खैर, फिल्म है और किसी फिल्म को टैक्स फ्री करने या देखने में कोई विवाद नहीं है। कई फिल्में टैक्स होती रही हैं। अब मंत्रीजी बेचारे टैक्स फ्री कराने का श्रेय तो नहीं ले सकते थे, इसलिए इन्होंने नौटंकी का नया तरीका ढूंढ निकाला।

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सिनेमाहॉल में जमीन पर बैठकर देखी फिल्म

मंत्रीजी अपने कार्यकर्ताओं के साथ फिल्म शतक देखने पहुंचे। बहुत सारी सीटें खाली थीं और पीछे भी काफी संख्या में लोग कुर्सियों पर बैठे हुए थे। मंत्रीजी अपने कुछ पट्‌ठों के साथ जमीन पर बिछे कालीन पर बैठ गए। तत्काल इसका फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। कार्यकर्ता मंत्रीजी की तारीफ में जुट गए कि उन्होंने अद्भुत मिसाल पेश की है। सच तो यह है कि मंत्रीजी ऐसा करके संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की नजरों में आना चाहते हैं।

मीडिया में तो बजता रहता है घंटा

मंत्रीजी को मीडिया की चर्चा में रहने की आदत है। इसलिए कभी किसी वरिष्ठ भाजपा नेता की आलोचना कर देना या फिर किसी पर भी तंज कस देना उनकी आदतों में शुमार है। मंत्रीजी को पता है कि वे क्या बोलेंगे कि मीडिया की सुर्खियों में आएंगे। जब भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों को मौत होने लगी तो एक नेशनल न्यूज चैनल के पत्रकार के सवाल को उन्होंने घंटा सवाल बता दिया। फिर क्या था यह घंटा पूरे देश में सुनाई दिया।

विधानसभा में भी नहीं रहता कंट्रोल

हालांकि मंत्रीजी पहले से ही बड़बोले हैं, लेकिन भागीरथपुरा के कांड के बाद उनको बोल और बिगड़ गए हैं। यही वजह है कि जब विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष ने भागीरथपुरा मामले में उनसे इस्तीफे की मांग की तो उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को औकात में रहने की बात कह डाली। मंत्रीजी को पता था कि इससे उनको कितना माइलेज मिलेगा और वे इसमें सफल रहे। बवाल इतना बढ़ा कि सीएम डॉ.मोहन यादव को सदन में माफी मांगनी पड़ी।

हाल ही में दिल्ली में हुए थे पेश

हाल ही में जब सीएम यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलने दिल्ली गए तो उसी दिन मंत्री विजयवर्गीय भी प्रहलाद पटेल के साथ पहुंच गए। अब ऐसी मुलाकातों को सौजन्य भेंट ही कहने की परंपरा रही है, लेकिन पार्टी सूत्रों को इसकी सौजन्यता पता है।

कुर्सी बचाने की कोशिश में मंत्रीजी

जब से मोहन यादव ने सीएम का पदभार ग्रहण किया है तब से विजयवर्गीय उनके नकारात्मक गतिविधियों सक्रिय हैं। मंत्रिमंडल में बड़ा विभाग मिलने के बाद भी वे संतुष्ट नहीं हुए और कदम-कदम पर सीएम के लिए गड्‌ढा खोदते ही नजर आते हैं। विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल तो कैबिनेट की बैठक में भी अपने तेवर दिखा चुके हैं। कहा जा रहा है कि मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार होना है और इसमें कई मंत्रियों का पत्ता कटने जा रहा है। विजयवर्गीय को अपनी कुर्सी की चिन्ता है, इसलिए वे हर तरह की नौटंकी कर रहे हैं।

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