न मौका न दस्तूर देखता है मंत्रीजी का पारा, बस दुश्मन दिखना चाहिए-मनोज पटेल भला कैसे भूल पाएंगे तिरंगा यात्रा की बेइज्जती

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इंदौर। शहर के राजनीतिक हलकों में मंत्रीजी का पारा हमेशा चर्चा में रहता है। वह न मौका, देखता है न दस्तूर, किसी की बेइज्जती का मन बना लें तो कहीं भी शुरू हो जाते हैं। ताजा उदाहरण तिरंगा यात्रा का है। जहां बड़ा गणपति चौराहे पर लगे मंच से शहर के सभी नेताओं के सामने खुलेआम विधायक मनोज पटेल की बेइज्जती की गई और सारे नेता चुप रहे। भला मंत्रीजी के सामने बोलकर अपनी बेइज्जती कौन कराना चाहेगा।

भाजपा के सूत्र बताते हैं कि बड़ा गणपति चौराहे पर लगे तिरंगा यात्रा के मंच पर मनोज पटेल को देखते ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पारा गर्म हो गया। आग-बबूला होते हुए मंत्रीजी ने कहा-चल हट यहां से, कहां घुस रहा है। जब देखो तब आगे-आगे घुसता रहता है। जब मनोज पटेल ने मंत्रीजी की तरफ देखा तो फिर मंत्रीजी ने कहा-चल हट यहां से। यह वाक्या जब हुआ तो मंच पर भाजपा के कई नेता मौजूद थे। किसी ने कुछ नहीं कहा और न किसी को कुछ कहने की हिम्मत थी। इस वाक्ये के बाद मंत्रीजी मंच के एक सिरे पर और पटेल दूसरे सिरे पर बैठ गए।

अपमान सहकर चुप कैसे रहे पटेल

भाजपा में इस बात की चर्चा है कि इतना अपमान सहने के बाद भी मनोज पटेल चुप क्यों रहे? चाहते तो यात्रा का बायकाट भी कर सकते थे, लेकिन पूरे समय वे यात्रा में रहे। भाजपा अब कहा जा रहा है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो मंत्रीजी की जुबान पर लगाम लगाना कठिन होगा।

पुतला जलाने के बाद से बौखलाए हैं मंत्री

मंत्रीजी की खासियत यह है कि उनकी जिनसे नहीं बनती उनसे गिन-गिन कर बदला लेते हैं। वे किसी भी मौके पर अपने दुश्मनों की बेइज्जती करने से नहीं चूकते। मनोज पटेल से अदावत तो विधानसभा चुनाव के बाद जगजाहिर हो गई थी, जब पटेल ने मंत्रीजी के खिलाफ खुलेआम मोर्चा खोल लिया था। यहां तक कि मंत्रीजी का पुतला भी जला दिया। मंंत्रीजी ने कहा था कि पता नहीं कैसे-कैसे लोग विधायक बन जाते हैं। एक विधायक द्वारा अपने ही मंत्री के पुतले जलाने की घटना पूरी भाजपा में चर्चा का विषय थी। सरकार बनने के बाद ऐसा पहला विवादित मामला सामने आया था। इसके बाद से मंत्रीजी बौखलाए हुए हैं।

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