TMC ऑफिस पर बागी गुट का कब्जा, बैठक के बाद लगाया ताला, अरूप रॉय का नाम लिखा बैनर टांगा

Date:

कोलकाता। विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी की मुसीबतें लगातार बढ़ी हैं। अब बागी विधायकों के गुट ने टीएमसी के दफ्तर पर कब्जा कर लिया है। बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल में नेता विपक्ष रितब्रता बनर्जी समेत 60 विधायक तृणमूल कांग्रेस के हेडक्वार्टर पहुंचे और वहां पांच मिनट तक मीटिंग भी की। इसके बाहर निकलकर गेट पर ताला लटका दिया।

बागी गुट ने ऑफिस में की बैठक

उल्लेखनीय है कि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र स्थित यह कार्यालय वर्ष 2022 से टीएमसी का संचालन मुख्यालय रहा है। पार्टी का मूल कार्यालय ईएम बाइपास पर पुनर्निर्माण के लिए बंद होने के बाद संगठन यहां से काम कर रहा था। इस कार्यालय से संचालन शुरू कर बागी गुट ने खुद को संगठन का वैध प्रतिनिधि साबित करने की कोशिश की। ऋतब्रत बनर्जी वरिष्ठ नेताओं फिरहाद हकीम, जावेद खान, संदीपन साहा और अखरुज्जमान के साथ कार्यालय पहुंचे और वहां बैठक की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही “वास्तविक” तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। गुट के नेताओं का कहना है कि उन्होंने कार्यालय के मालिकों के साथ आवश्यक समझौते की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब से इसी कार्यालय से पार्टी का संचालन करेंगे।

अरूप रॉय का नाम लिखा बैनर भी टांगा

बागी गुट ने कार्यालय के बाहर एक बैनर भी टांगा है, जिसमें अध्यक्ष के रूप में ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय का ना लिखा है। ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायक उनके साथ हैं, जो कि दो-तिहाई से अधिक बहुमत है। इसके अलावा उन्होंने आयोग को बताया कि पार्टी के अधिकांश काउंसलर, कॉर्पोरेटर और जिला परिषद सदस्य भी उनके गुट का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने आयोग को सूचित किया कि 22 जून 2026 को हुए पार्टी के एक विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

कुणाल घोष ने ताला लगाने का किया विरोध

टीएमसी ऑफिस पर कब्जा किए जाने के बाद नेता कुणाल घोष ने कहा कि  अगर पार्टी के किसी  विधायक को पार्टी ऑफिस आना है, तो यह उनका अधिकार है। ये ताले क्यों लगाए जा रहे हैं? जब तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हमले होते हैं और उन्हें मदद की जरूरत होती है, तो ये लोग अपने चुनाव क्षेत्रों में नहीं जाते। इसके बजाय वे किसी और के हाथों की कठपुतली बन गए हैं और यह सब कर रहे हैं।  इधर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट के बागी नेता संदीपन साहा ने कहा,  यह हमारा ऑफिस है, हमारी जिम्मेदारी है। पार्टी की भविष्य की गतिविधियां यहीं होंगी।

भाजपा ने कहा-सिर्फ भतीजा ममता के साथ

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि टीएमसी बंगाल में एक इतिहास बन गई है। ममता बनर्जी को सांसद छोड़ गए। विधायक छोड़ गए। कार्यकर्ता छोड़ गए। पंचायत ब्लॉक के जो उनके पंचायत समिति के मेंबर थे, वे भी छोड़ गए, मेयर छोड़ गए। सिर्फ उनका भतीजा ही उनके साथ है। ममता बनर्जी अब अल्पमत में रह गई हैं। अब यह चुनाव आयोग को तय करना है कि कौन-सी पार्टी है और उसके नेता कौन है।

Ardhendu Bhushan
Ardhendu Bhushanhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

Film Review : अल्फा या अल्फी?  सेजवान  नूडल्स में दही लेंगे या आम का रस?

यशराज फिल्म्स का नया स्पाई यूनिवर्स चैप्टर। आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की जोड़ी, बॉबी देओल खलनायक, अनिल कपूर रॉ चीफ और हृतिक रोशन का कैमियो—सब कुछ है, लेकिन... लेकिन तर्क नहीं। द रेलवे मेन का डायरेक्टर इसका भी डायरेक्टर है। वह शिव रवैल हैं। सेजवान नूडल्स में दही डाल दें या आम का रस, मर्जी है उनकी। अब तक जिस यूनिवर्स में सलमान खान, ऋतिक रोशन और शाहरुख खान पिस्तौलें चमकाते दिखते थे, इस बार वह कमान पूरी तरह दो हीरोइनों के हाथ में सौंप दी गई है—आलिया भट्ट और शरवरी वाघ।