पीएम मोदी की चीन यात्रा पर सियासत तेज, ओवैसी ने उठाए कड़े सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन जाने वाले हैं। इस यात्रा को लेकर भारत में सियासत गर्मा गई है।
👉 यह भी पढ़ें:
- PM Modi का बड़ा ऐलान! भारत-न्यूजीलैंड बने Strategic Partners, FTA, Direct Flights और ₹35,000 करोड़ व्यापार लक्ष्य पर ऐतिहासिक समझौता
- PM Modi in Australia: MCG से पीएम मोदी का बड़ा विजन, 2036 Olympics और New India पर दिया बड़ा संदेश!
- PM Modi Australia Visit: भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए बड़े समझौते! रक्षा, यूरेनियम, गगनयान और व्यापार पर ऐतिहासिक फैसले, क्या बदल जाएगी इंडो-पैसिफिक की ताकत?
- PM Modi Australia Visit: क्या भारत बनेगा दुनिया का नया भरोसेमंद पार्टनर? ऊर्जा संकट के बीच मेलबर्न से पीएम मोदी का बड़ा संदेश
- PM Modi Gets Indonesia’s Highest Civilian Award: इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘Bintang Adipurna’, भारत के लिए ऐतिहासिक सम्मान
- PM Modi Indonesia Visit: जकार्ता में पीएम मोदी का शाही स्वागत, BrahMos Missile डील से लेकर रक्षा-व्यापार तक कई बड़े समझौते संभव
ओवैसी की आलोचना और सवाल
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार से चीन को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार के चीन नीति में आए यू-टर्न पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और सरकार को पीएम की यात्रा से पहले देश को जवाब देना चाहिए।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि चीन ने पाकिस्तान को हथियार और फाइटर जेट दिए, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय जवानों के खिलाफ हुआ। इसके अलावा, चीन ने पाकिस्तान को इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा भी मुहैया कराया। ओवैसी ने सवाल किया कि भारत सरकार चीन को स्पष्ट रूप से यह क्यों नहीं कह रही कि यह अस्वीकार्य है।
उन्होंने आगे कहा कि जब पीएम मोदी ने दलाई लामा को 90वें जन्मदिन की बधाई दी, तब चीन ने कड़ी आपत्ति जताई, लेकिन भारत सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
भारत-चीन वार्ता का दौर
इसी बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे पर हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत-चीन संबंधों को संतुलित और आगे बढ़ाने के लिए भारत प्रतिबद्ध है।



