इंदौर। नगर निगम इंदौर के बजट अधिवेशन से शुरू हुआ वंदे मातरम विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। धीरे-धीरे कांग्रेस और भाजपा नेता ही इसकी पोल खोल रहे हैं। लोगों को समझ आने लगा है कि यह तो मिलीजुली कुश्ती थी। ऐसे में जिम्मेदारों से जनता का सवाल है कि क्या इंदौर में और कोई मुद्दा नहीं बचा?
उल्लेखनीय है कि नगर निगम के बजट अधिवेशन में कांग्रेस की दो पार्षदों फौजिया शेख अलीम और रूबिना इकबाल खान ने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दया था। इतना ही नहीं, उन्होंने इस पर जमकर बयानबाजी की। फौजिया तो फिर भी थोड़ा बोलकर रुक गईं, लेकिन रूबिना खान ने तो इसे बात का बतंगड़ बना दिया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि किसी की औकात नहीं जो गवाकर दिखा दे। रूबिना ने कांग्रेस को भाड़ में जाने की बात भी कह दी। अब कांग्रेस रूबिना के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रही है, लेकिन फौजिया को भूल गई है।
कांग्रेस नेता ही खोल रहे पोल
इस मामले में कांग्रेस नेताओं के जो बयान सामने आए हैं, उनसे मिलीजुली कुश्ती उजागर हो रही है। कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने कहा कि प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए फौजिया शेख अलीम, रुबीना खान और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बीच डील हुई है। उन्होंने कहा कि शेख अलीम अभी स्टेट बार काउंसिल का चुनाव लड़ रहे हैं। इस डील से उन्हें मदद मिलेगी।
इससे पहले कभी नहीं किया विरोध
इसी बीच निगम परिषद के सम्मेलन के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें फौजिया शेख अलीम और रूबिना खान वंदे मातरम के समय खड़ी नजर आ रही हैं। एक वीडियो 2023-24 और दूसरा 2026-27 का है। दोनों में रुबीना वंदे मातरम् गाते और नारे लगाते दिख रही हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि बजट अधिवेशन में दोनों ने विरोध कर दिया। भले ही नहीं गातीं, हमेशा की तरह खड़े ही हो जातीं। माना कि यह भी नहीं करतीं, बयानबाजी की क्या जरूरत थी।
चौकसे और अलीम की अदावत जगजाहिर
उल्लेखनीय है कि शेख अलीम की पत्नी पार्षद फौजिया शेख नेता प्रतिपक्ष भी रही हैं। उनके पति शेख अलीम का भी निगम में काफी हस्तक्षेप रहता था। सबको पता है कि अलीम दर्शक दीर्घा में बैठे रहते थे, लेकिन कुछ समय पहले उनका चिंटू चौकसे से विवाद हो गया था। इसके बाद अलीम ने आना बंद कर दिया था।
महापौर की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
कांग्रेस नेताओं का साफ-साफ आरोप है कि यह सबकुछ सोची-समझी साजिश है और इसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव की भूमिका है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष और निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे का साफ कहना है कि महापौर और भाजपा पार्षद नहीं चाहते थे कि सदन में शहर के मुद्दों पर चर्चा हो। इसलिए यह षड्यंत्र रचा। कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया तो महापौर पर सीधा-सीधा आरोप लगा रहे हैं।
इस हंगामे से भाजपा को ही हुआ फायदा
भले ही पूरी दाल काली नहीं है, लेकन कुछ न कुछ काला तो है। इस हंगामे के बीच भागीरथपुरा से लेकर शहर के अन्य मुद्दे सदन में नहीं उठ पाए। बजट पर बहस भी नहीं हुई और न ही कांग्रेस पार्षद कुछ सवाल कर पाए। सवाल होता तो जवाब भी देना ही पड़ता। जाहिर है इस विवाद से भाजपा को ही फायदा हुआ है। और यही वजह है कि भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा से लेकर वरिष्ठ नेता भी इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। मिश्रा ने तो सभी वार्डों में वंदे मातरम गायन का आयोजन भी कर दिया।


