भाजपा के ‘बांका’ के एक साल, न संतुलन बना न संभला संगठन, पहली बार भाजपा कार्यालय पर पुती कालिख

Date:

इंदौर। भाजपा के बांका यानी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के एक साल पूरे हो गए हैं। काफी मशक्कत और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कृपा से मिश्राजी पद तो पा गए, लेकिन उसे संभाल नहीं पाए। एक साल की उपलब्धियों के नाम पर भाजपा कार्यालय पर उनके खिलाफ प्रदर्शन से लेकर कई विवाद उनके खाते में दर्ज हैं। संतुलन बनाने की बात कह वे न तो संगठन ही संभाल पाए और न ही भाजपा कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर पाए।

उल्लेखनीय है कि सुमित मिश्रा जब नगर अध्यक्ष बने थे, तब उन्होंने सभी के साथ संतुलन बनाने की बात कही थी। शुरू-शुरू में ऐसा लगा भी कि वे भाजपा में गुटबाजी खत्म कर देंगे और अपने ऊपर मंत्रीगुट का होने का ठप्पा भी मिटा देंगे। इंदौर की विडंबना है कि ऐसा नहीं हुआ। मिश्राजी का कार्यकाल जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया, उनकी हकीकत सामने आने लगी। बड़बोले तो वे हैं ही, वरिष्ठ नेताओं की समझाइश के बाद भी वे अपने मुंह पर कंट्रोल नहीं रख पाए।

इंदौर भाजपा कार्यालय पर पहली बार पुती कालिख

सुमित मिश्रा ने जब से कार्यभार संभाला है, तब से विवादों में घिरे रहे हैं। जब नगर कार्यकारिणी घोषित हुई थी, तब विरोध इतना जबरदस्त हुआ कि इंदौर के इतिहास में पहली बार भाजपा कार्यालय पर अपने ही नगर अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। पुतले जलाए गए, नारे लगाए गए, पोस्टर के साथ ही भाजपा कार्यालय में घुसकर नगर अध्यक्ष के नेमप्लेट पर कालिख पोती गई। इतना सब होने के बाद भी मिश्राजी चुप ही रहे।

आम कार्यकर्ताओं को मिली निराशा

भाजपा की नगर कार्यकारिणी में सुमित मिश्रा ने कुछ ऐसे लोगों को बैक डोर एंट्री दे दी, जिस पर आज भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसमें सबसे प्रमुख नाम इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से जुड़ीं डॉ.दीप्ति हाड़ा का है, जिसे ‘बांका ने कार्यकारिणी में न केवल जगह दी, बल्कि उपाध्यक्ष पद भी दिया। ऐसे ही कई और नाम शामिल हैं, जिनका भाजपा से कोई लेनादेना नहीं। ऐसे में जमीनी कार्यकर्ताओं को काफी निराशा हाथ लगी है।

भागीरथपुरा मामले में राजनीति करने की कोशिश

बांका के आका कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा के भागीरथपुरा में जब गंदे पानी से मौतें हुईं, तब भी बांका की भूमिका पर सवाल उठाए गए। बांका इस मामले में न तो भागीरथपुरा के लोगों को संबल दे पाए और न ही अपने आका की कोई मदद कर पाए। और तो और अब बांका इस मामले पर अपनी राजनीतिक गोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं। मिश्राजी की नजर अब एमआईसी पर है और वे अब भागीरथपुरा के नाम पर अपने कुछ लोग यहां फिट कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

टिक्कड़ पार्टी में अक्षत चौधरी से भिड़ गए

सूत्र बताते हैं कि अब बांका ने अक्षत चौधरी को भाजयुमो अध्यक्ष बनाने का दिलासा दिया है। इसके एवज में अक्षत लगातार बांका के कहने पर भीड़ भी जुटा रहे हैं और पैसे भी खर्च कर रहे हैं। हाल ही में जब भागीरथपुरा में 30वीं मौत हुई थी, उसी दिन बांका ने एसआईआर की सफलता को लेकर एक टिक्कड़ पार्टी दी थी। इसी पार्टी में अक्षत चौधरी ने बांका से कह दिया कि आपसे कुछ काम है। इस पर बांका जी भड़क गए और कहा कोई काम-वाम नहीं है। जो भी बात करना है रमेश जी से करो। मैं तुम्हें अध्यक्ष नहीं बनाऊंगा। इस पर अक्षत ने कहा कि अब मुझे यह मत कहना कि बैनर-पोस्टर लगवा दो या कार्यक्रम में भीड़ जुटा दो। बताया जाता है कि इस मामले में पूर्व विधायक जीतू जिराती ने भी हस्तक्षेप किया और बांका को खरी-खटी सुनाई।

अब लोगों को याद आ रहे हैं गौरव रणदिवे

सुमित मिश्रा के कार्यकाल को देखकर अब भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे की याद आ रही है। लोग कह रहे हैं कि गौरव पार्टी को जिस हाइट पर लेकर गए थे, मिश्राजी ने उसे उतना ही नीचे ला दिया है। मिश्राजी सिर्फ संतुलन की बात करते रहे, लेकिन असली संतुलन तो गौरव रणदिवे ने बनाया था। सभी को संतुष्ट करना, बड़े-छोटे का ध्यान रखना कोई गौरव से सीखे। इसीलिए पार्टी ने उन्हें प्रदेश महामंत्री जैसे पद से नवाजा।

लगाने-भिड़ाने के खेल में माहिर हैं बांका

भाजपा के कार्यकर्ता ही कह रहे कि सुमित मिश्रा लगाने-भिड़ाने में ही व्यस्त हैं। यह सारे विधायक और पार्टी के नेता समझने लगे हैं और मिश्राजी के भरपूर मजे ले रहे हैं। मिश्राजी की एक और खासियत है कि किसी भी राजनीतिक विवाद में वे जिधर दम, उधर हम की तर्ज पर शामिल हो जाते हैं। लोग तो यह भी कह रहे हैं कि मिश्राजी जो पौधा रोप रहे हैं, वह आगे उनको काफी तकलीफ देगा। जब वे पद से उतरेंगे और विधायक का टिकट मांगने जाएंगे तो उन्हें अपनी सही स्थिति का पता चलेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related