तृष्णा की मृगतृष्णा : रजिस्ट्रार के रोक के बावजूद उप रजिस्ट्रार ने संस्था का पंजीयन किया था निरस्त, पिंटू छाबड़ा को पहुंचाया फायदा

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इंदौर। जिस जमीन पर अपनी जादूगरी से पिंटू छाबड़ा ने सी-21 बिजनेस पार्क तान दिया है, उसकी परतें धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं। किस तरह सरकारी विभागों का इस्तेमाल कर इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है, उसके रहस्य से पर्दा भी उठने लगा है। जिस तृष्णा संस्था से छाबड़ा की कंपनी बेबीलोन ने यह जमीन खरीदी, उसका पंजीयन भी गलत तरीके से निरस्त करवाया गया। जिस समय पंजीयन निरस्त हुआ, रजिस्ट्रार ने पंजीयन निरस्त करने पर रोक लगा रखी थी।

16 जनवरी 2017 को आयुक्त सहकारिता एवं पजीयक कवीन्द्र किवायत ने प्रदेश के सभी सहकारिता संयुक्त आयुक्त एवं उप आयुक्त को एक ऑफिशियल लेटर जारी किया था। इसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि गृह निर्माण सहकारी समितियों का परिसमापन आगामी आदेश तक नहीं किया जाए। इस पत्र में यह भी कहा गया था कि पहले विभाग द्वारा म.प्र. सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 69 के तहत सहकारी संस्थाओं के परिसमापन की कार्यवाही शीघ्र कराने तथा निष्क्रिय समितियों को परिसमापन में लाए जाने के निर्देश दिए गए थे, जिस पर आगामी आदेश तक रोक लगाई जा रही है।

उप आयुक्त ने रजिस्ट्रार का आदेश नहीं माना

अब जरा देखिए सहकारिता विभाग में खेल कैसे होता है। रजिस्ट्रार के आदेश के बावजूद 30 जुलाई 2018 को उप रजिस्ट्रार सहकारी संस्थाएं जिला इंदौर के. पाटनकर ने तृष्णा गृह निर्माण संस्था का पंजीयन निरस्त कर दिया। अब यह जांच का विषय है कि आखिर पाटनकर की ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्होंने रजिस्ट्रार का आदेश भी नहीं माना।

फिर इंदौर आने की तैयारी में पाटनकर

सूत्र बताते हैं कि भूमाफियाओं के चहेते पाटनकर साहब फिर से इंदौर आने की जुगत लगा रहे हैं। इंदौर के कई भूमाफिया इसमें उनकी मदद कर रहे हैं। भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए अपने से बड़े अफसरों के आदेश नहीं मानना पाटनकर की आदत है और इसीलिए उनके खिलाफ कई बार शिकायत हो चुकी है। बताया जाता है कि प्रदेश की कुछ जांच एजेंसियों तक भी मामला पहुंचा था।

विभाग में तृष्णा का रिकॉर्ड भी नहीं

सूत्र बताते हैं कि पाटनकर साहब द्वारा पंजीयन निरस्त करने के बाद तृष्णा गृह निर्माण संस्था का रिकॉर्ड भी सहकारिता विभाग से गायब है। अब यह तो नहीं कहा जा सकता कि पाटनकर साहब ने गायब कराया होगा, लेकिन निश्चित तौर पर जिसकी इस संस्था में रुचि होगी उसने ऐसा कराया होगा। हां, विभाग को पाटनकर साहब का वह लेटर जरूर मिला है, जिसमें पंजीयन निरस्त कराने का आदेश है।

पिंटू छाबड़ा ने फर्जी तरीके से खरीदी जमीन

कुछ समय पहले गृह मंत्री अमित शाह से ग्राम खजराना तहसील जिला इन्दौर .प्र. के पटवारी हल्का नं. 16 में स्थित सर्वे नं. 33 रकबा 2.75 एकड़ तथा सर्वे नं. 28/2 रकबा 1.84 एकड़ की शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता ने कहा है कि उसके पार्टनर ने बालेबाले उक्त भूमि तृष्णा गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. इन्दौर को हस्तांतरित कर दी। तृष्णा गृह निर्माण सहकारी संस्था ने वह जमीन चुघ हाउसिंग एंड डेवलपर्स, मेसर्स बेबीलान इन्फ्रास्ट्रक्चर्स प्रा.लि. हरियाणा और तीन अन्य लोगों को बेच दी, जिसका उसे कोई वैधानिक अधिकार नही था। अब इस पर सी-21 बिजनेस पार्क बन चुका है। गृह मंत्रालय के आदेश पर जब जांच शुरू हुई तो इस जमीन के रहस्य से पर्दा उठने लगा है।

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