लोकसभा चुनाव तो सबको याद होगा। जब नाम वापिसी के आखिरी दिन इंदौर के कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने अपना नाम वापस ले लिया था। कुछ ही देर बाद एक फोटो सोशल मीडिया पर तैर रहा था, जिसमें बम, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ एक कार में बैठे नजर आ रहे थे। देखते ही देखते पूरे देश में यह खबर आग की तरह फैल गई।
मंत्री विजयवर्गीय ने यह काम दिल्ली आलाकमान की नजरों में अपना नंबर बढ़ाने के लिए किया था, लेकिन इसका खामियाजा यह हुआ कि इंदौर में नोटा वर्सेस भाजपा की लड़ाई हो गई। ऐन मौके पर कांग्रेस उम्मीदवार को भाजपा में शामिल कराने से लोगों में काफी आक्रोश था। यही वजह है कि इंदौर में नोटा को पूरे देश में सबसे ज्यादा वोट मिले।
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उस समय सबके मन में यही था कि अक्षय बम ने आखिर ऐसा क्यों किया। धीरे-धीरे राज खुला कि मंत्री की तरफ से यह वादा किया गया था कि अक्षय के सारे गलत धंधे वे बचा लेंगे। बताया जाता है कि इसमें सबसे बड़ा वादा उनके पिता कांतिलाल बम की होप मिल की जमीन को लेकर था। मंत्री जी का वादा और उनके दबदबे की स्टाइल देख बम भी निश्चिंत हो गए थे।
अभी तक सबकुछ ठीक चल रहा था। अचानक 20 अगस्त को कलेक्टर आशीष सिंह ने एक बम फोड़ दिया। उन्होंने होप टेक्सटाइल मिल की जमीन की लीज निरस्त करने का आदेश दिया और तहसीलदार को तीन दिन में कब्जा लेने के निर्देश दिए। तीन दिन का इंतजार कौन करता, अगले ही दिन यानी 21 अगस्त को प्रशासन की टीम ने कब्जा ले लिया। तब से कई सारे सवाल राजनीतक गलियारों में तैर रहे हैं।
भाजपा में इस बात की चर्चा है कि क्या ठाकुर के हाथ फिर से काट दिए गए हैं? कुछ नेता तो यह भी कह रहे हैं कि ठाकुर के हाथ तो पहले से ही कटे हुए थे, लेकिन वह यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि हाथ फिर से जुड़ गए हैं। भाजपा में यह भी चर्चा है कि कलेक्टर ने इतनी बड़ी कार्रवाई अपने मन से तो की नहीं होगी।
सवाल बहुत सारे हैं। जवाब भी कई हैं। ठाकुर को भी साफ संदेश है, लेकिन इतनी समझ की उम्मीद कोई उनसे नहीं करता।



