लोकसभा में ‘अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक, 2025’ पेश, कांग्रेस-टीएमसी ने किया विरोध

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लोकसभा में 'अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक, 2025' पेश, कांग्रेस-टीएमसी ने किया विरोध
लोकसभा में 'अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक, 2025' पेश, कांग्रेस-टीएमसी ने किया विरोध

लोकसभा में ‘अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक, 2025’ पेश, कांग्रेस-टीएमसी ने किया विरोध

भारत में प्रवासन कानूनों को आधुनिक और सख्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में ‘अप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक, 2025’ पेश किया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया, जिसका कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ा विरोध किया।

विपक्ष का विरोध और आपत्तियां

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नियमों का हवाला देते हुए इस विधेयक को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया और इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने की मांग की। इसी तरह, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी विधेयक को सदन में पेश किए जाने का विरोध किया।

सरकार का तर्क

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत आता है और भारत सरकार का संप्रभु अधिकार है कि वह विदेशियों के प्रवेश और प्रस्थान को नियंत्रित करे। उन्होंने बताया कि पासपोर्ट अधिनियम 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939, विदेशी अधिनियम 1946 और आप्रवास अधिनियम 2000 को रद्द कर एक नया व्यापक कानून बनाया जा रहा है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों की अनिवार्यता स्पष्ट की जाएगी।
✔ विदेशी नागरिकों के वीजा और पंजीकरण की प्रक्रिया को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा।
✔ भारत आने और जाने वाले लोगों के लिए कड़े नियम बनाए जाएंगे।
✔ केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में अधिक अधिकार दिए जाएंगे।

क्या होगा असर?

यह विधेयक प्रवासन और विदेशी नागरिकों की निगरानी को मजबूत करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विदेशियों के आगमन और प्रस्थान को नियंत्रित करने के लिए सरकार को अधिक शक्तियां प्रदान करेगा। अब देखना यह होगा कि इस विधेयक पर आने वाले दिनों में संसद में क्या बहस होती है और क्या इसे विरोध के बावजूद पारित किया जाता है।

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