बिहार में 56 लाख मतदाताओं के नाम होंगे हटाए, चुनाव आयोग चला रहा है विशेष पुनरीक्षण अभियान
बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के तहत राज्य की मतदाता सूची से कम से कम 56 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। यह कदम मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए उठाया गया है।

हटाए जाने वाले मतदाताओं की स्थिति:
- 20 लाख मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
- 28 लाख मतदाता अपने पंजीकृत पते से स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं।
- 1 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका कोई अता-पता नहीं है।
- 7 लाख मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए हैं।
इस प्रकार कुल 56 लाख नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में हैं।
गणना प्रपत्र की स्थिति:
अधिकारियों के अनुसार, अब तक 7.7 करोड़ (90.89%) मतदाताओं के गणना प्रपत्र एकत्रित कर लिए गए हैं और उनका डिजिटलीकरण भी किया जा चुका है। हालांकि अभी भी 15 लाख मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपने प्रपत्र वापस नहीं किए हैं। इन्हें लेकर चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के साथ समन्वय बनाकर जानकारी इकट्ठा कर रहा है।
जन आलोचना और सवाल:
एसआईआर प्रक्रिया के पहले चरण में चौंकाने वाले आँकड़े सामने आने के बाद जनता और स्थानीय लोग सवाल उठाने लगे हैं।
बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर्स) से यह पूछताछ की जा रही है कि कहीं इस प्रक्रिया के जरिए मृत, दोहरे पंजीकृत या अवैध प्रवासी मतदाताओं को सूची में बनाए रखकर फर्जी मतदान को तो नहीं बढ़ावा दिया गया था?
इसी संदर्भ में एसआईआर की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर चिंता और आलोचना भी सामने आ रही है।
दस्तावेजों को लेकर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण:
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों का उपयोग सत्यापन के लिए किया जा रहा है, लेकिन उन्हें अनिवार्य रूप से मान्यता देना बाध्यकारी नहीं है। आयोग ने यह भी कहा है कि उसका उद्देश्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न हो।
यह महाअभियान बिहार की चुनावी पारदर्शिता के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसमें निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करना आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती भी बनता जा रहा है।


