कमजोर स्क्रीनप्ले और लॉजिक की कमी के कारण एक यादगार लव स्टोरी बनते-बनते रह गई ‘डकैत: एक प्रेम कथा’

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-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार

एक  इंटेंस और इमोशनल एक्शन-रोमांस फिल्म है, जो  प्यार, धोखे, गुस्से और बदले की  कहानी है।  वक्त और हालात कैसे रिश्तों को बदल देते हैं और कैसे कुछ फैसले पूरी जिंदगी की दिशा बदल देते हैं, सब इसमें दिखाया गया है.  

ये शेनिल देव  की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म है जो तेलुगु और हिन्दी  में बनी है। फिल्म का असली हीरो गुस्से, दर्द और बदले की आग को  नैचुरल तरीके से निभा हैं कि आपको लगेगा ये उनका पर्सनल स्टोरी है। एक्शन सीक्वेंस कमाल का  है, जहां प्यार रॉन्ग टर्न ले लेता है।  शुरू हो जाती   है प्रतिशोध, हिंसा और विध्वंस की दास्तान।  कमजोर स्क्रीनप्ले और लॉजिक की कमी के कारण यह एक यादगार लव स्टोरी बनते-बनते रह गई। निर्देशक ने कहानी की जगह एक्शन को ज्यादा तवज्जो दे दी।

हत्या और बलात्कार की सजा काटने वाला  हरि जिस लड़की जूलियट  से दिलो -जान से मोहब्बत करता था, उसी गर्ल फ्रेंड की झूठी गवाही  उसकी जिंदगी तबाह कर देती है।   वो  जेल से भागकर एक्स प्रेमिका  को बर्बाद करके अपना बदला पूरा करना चाहता है। मगर जब दोनों  एक बार फिर से टकराते हैं, तब  नफरत के बावजूद पुराने जज्बात उभरकर  आ जाते हैं।  फिर कुछ  राज खुलते हैं और फिर  दोनों का रिश्ता और जटिल हो जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम की जटिल परतों को खंगालने का काम करता है पुलिस इंस्पेक्टर स्वामी  और उसकी पुलिस अधिकारी बेटी।  मगर जब ये परतें खुलती हैं, तो गुस्से, बदले और तबाह करने वाला जज्बा धुंधला हो जाता है और ‘ मेरा दिल जला है, अब मैं  दुनिया जला कर राख कर दूंगा’वाला भाव गायब हो जाता है। 

फिल्म के डायलॉग्स दिलचस्प हैं :

धोखे की आग में झुलसता हीरो बदले में कहता है  – आई वांट माय लाइफ बैक! अपनी मेहबूबा से कहता है-“जूलियट… जूलियट, डोंट लाइ, तेल द ट्रुथ !”

-”अब हमें शादी कर लेनी चाहिए और मुझे,  तुम्हें और नन्हे बेटे को साथ में रहना चाहिए!…. नहीं नहीं….बेटा नहीं बेटी !”

-”जब मर्जी हुई चोरी करने आ जाते हो।मेरा दिल कोई एटीएम  हैं क्या?”

फिल्म का पहला हिस्सा धीमा है, जहां कहानी अपना ही बोझ नहीं ढो पाती। इंटरवल के बाद  एक्शन से कहानी  थोड़ी पकड़ बनाती  है। कुछ ट्विस्ट  चौंकाते हैं,  लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले के कारण पूरी फिल्म लगातार हिचकोले खाती  रहती है।

तकनीकी पक्ष अच्छा है। सिनेमैटोग्राफी कहानी के रॉ और कठोर भाव को  सामने लाती है। निर्देशक का झुकाव  विज़ुअल अपील पर ज्यादा दिखता है। कहानी बिना ठोस बिल्ड-अप के एक मूड से दूसरे मूड में गुलाटी मारती है।  आमतौर पर प्रेम कहानियों की जान उसका संगीत  होता है, यहाँ नहीं है।  गाने भरती किये गए हैं। फिल्म की भावनात्मक पकड़ नहीं है।

तेलुगु अभिनेता अदिवि  शेष और मृणाल ठाकुर की जोड़ी  जमती है।अनुराग कश्यप, प्रकाश राज, सुनील और अतुल कुलकर्णी  सपोर्टिंग कास्ट में औसत हैं।

निर्देशक  शेनिल देव  ने पहली फिल्म में एक्शन, रोमांस और ड्रामा को   मिक्स किया है।  एक्शन और लोकेशन्स अच्छी हैं। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को इंटेंस बनाते हैं।

टालनीय फिल्म !

कमजोर स्क्रीनप्ले और लॉजिक की कमी के कारण एक यादगार लव स्टोरी बनते-बनते रह गई ‘डकैत: एक प्रेम कथा’

-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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