स्मृति शेष : जब उमराव जान ने बदल दी थी आशा भोसले की शोख और चंचल आवाज, आज भी दिल चीर देती है-दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए…

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-हरीश फतेहचंदानी, न्यूज हेड, एचबीटीवी न्यूज

इंदौर। प्रसिद्ध गायिका आशा भोसेले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 8 दशकों से अधिक तक लोगों के दिलों पर राज करने वाली आशा भोसले ने रविवार को 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। आशा भोसले ने 1943 में 10 साल की उम्र में गायन की शुरुआत की और लगभग 80 वर्षों तक भारतीय संगीत पर राज किया। उन्होंने हर शैली के गाने गाए, जिम्मे फिल्मी, पॉप और शास्त्रीय शैली के गाने शामिल हैं। आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए हैं।

आशा भोसले की बड़ी बहन की पहचान जहां गंभीर गानों के लिए थी, वहीं आशा अपनी चंचल-शोख-चुलबुली अदाओं के लिए जानी जाती थीं। जब मौका मिला और गजल गाने गाईं तो सब पर भारी पड़ गईं। बताया जाता है कि फिल्म उमराव जान में संगीतकार खय्याम पाकीज़ा से भी आगे कुछ करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जब आशा भोसले को चुना तो चर्चा यह होने लगी कि क्या आशा गजल गा पाएंगी। उन्होंने आशा से साफ कह दिया था कि हमारे गानों में आशा नहीं चाहिए। इसके बाद जो कुछ भी हुआ सबके सामने है। आज भी दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए, लोगों का दिल चीर जाती है। इस फिल्म के गानों-‘इन आंखों की मस्ती के’ और ‘ये क्या जगह है दोस्तों’ आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं।

पहला गाना मराठी फिल्म में

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को आशा भोसले का जन्म एक संगीत से जुड़े परिवार में हुआ। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक एक्टर और क्लासिकल सिंगर थे। आशा भोसले स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। आशा भोसले जब नौ साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनका परिवार पुणे से कोल्हापुर और बाद में मुंबई आ गई। बड़ी बहन लता मंगेशकर के पद्चिन्हों पर चलते हुए वह भी संगीत की दुनिया में आईं। आशा भोसले ने पहला गीत मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ (1943) में ‘चला चला नाव वाला’ गाया था। जबकि बॉलीवुड में उनका पहला गाना ‘चुनरिया (1948)’ फिल्म में ‘सावन आया’ था।

भजन से लेकर पॉप तक गाया

आशा भोसले ने अपने करियर में तकरीबन 12 हजार से ज्यादा गाना गाए हैं, जिनमें ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘ये मेरा दिल’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘इन आंखों की मस्ती के’, ‘दिल चीज क्या है’ जैसे सदाबहार गीत शामिल हैं। इनके अलावा उन्होंने गजल, भजन, पॉप और क्लासिकल हर शैली में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। आशाजी ने ओ.पी. नैयर, आर.डी. बर्मन और ए.आर. रहमान के साथ मिलकर कई यादगार गीत दिए।

9 फिल्मफेयर से लेकर गिनिज बुक तक

आशा भोसले राष्ट्रीय पुरस्कार, फिल्मफेयर अवॉर्ड, दादासाहेब फाल्के सम्मान और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया था उनकी गिनती दुनिया के सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाले कलाकारों में भी की जाती है। आशा भोसले पहली भारतीय सिंगर थीं जो ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुई थी। उन्हें पद्मभूषण से भी नवाजा गया था। गिनीज बुक में आशा ताई का नाम दर्ज है। साल 2011 में उन्हें 20 भाषाओं में 11,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने के लिए यह सम्मान मिला था। उन्होंने अपने करियर में कुल 9 फिल्मफेयर अवार्ड जीते हैं।

देश के सर्वोच्च सम्मानों से भी सम्मानित

आशा भोसले को भारत सरकार द्वारा कई प्रतिष्ठित सम्मान भी दिए गए हैं, जिनमें दादासाहेब फाल्के अवार्ड और पद्म विभुषण शामिल हैं. उनकी आवाज ने कई दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया है.

तकलीफों से भरा रहा है जीवन

आशा भोसले का जीवन तकलीफों से भरा रहा है। आशा ने पहली शादी 16 साल की उम्र में घर से भागकर की थी। उनके पहले पति का नाम गणपतराव भोसले था। आशा भोसले के परिवार और बहन लता मंगेशकर को यह रिश्ता मंजूर नहीं था, क्योंकि वह तब सिर्फ 16 साल की थीं और गणपतराव 31 साल के थे। आशा भोसले नहीं मानीं और घर से भागकर गणपतराव से शादी कर ली। हालांकि, ये शादी 11 साल बाद ही टूट गई।आशा भोसले के साथ उनके ससुरालवाले बहुत बुरा बर्ताव करते थे। उनके साथ मारपीट की जाती। दुखी होकर आशा भोसले ने जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया था। हालांकि, परिवार ने उन्हें संभाल लिया। वह पति से अलग हो गईं और जब अपने मायके लौटीं तो परिवार संग दूरियां कम होने लगीं।  

आरडी बर्मन से शादी भी नहीं रही आसान

आशा भोसले के पहली शादी से तीन बच्चे थे- हेमंत, वर्षा और भोसले आनंद। हेमंत, आशा के सबसे बड़े बेटे थे और वह म्यूजिक कंपोजर थे, पर साल 2015 में कैंसर से उनकी मौत हो गई। तब वह 66 साल के थे। उनका बेटा चैतन्य यानी आशा भोसले का पोता एक सिंगर है। वहीं, बेटी वर्षा भोसले एक पत्रकार थीं, पर उन्होंने 2012 में खुदकुशी कर ली। आशा भोसले पहली शादी टूटने के बाद करीब 20 साल तक अकेली रहीं और फिर 47 साल की उम्र में दूसरी शादी कर ली। उन्होंने दूसरी शादी मशहूर म्यूजिक कंपोजर आरडी बर्मन से की, जिन्हें सब पंचम दा के नाम से बुलाते थे। बताया जाता है कि आरडी बर्मन की मां ने उनसे साफ कह दिया था कि अगर यह शादी होगी तो उनकी लाश के ऊपर से गुजरने के बाद होगी।

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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