👉 यह भी पढ़ें:
- ट्रंप का बड़ा दावा — कुछ ही घंटों में ईरान की नौसेना और वायुसेना तबाह;हम जीत गए
- भारतीय वायुसेना का Su-30 MKI फाइटर जेट रडार से हुआ गायब, असम के ऊपर से उड़ान भरने के दौरान टूटा संपर्क, तलाश जारी
- तेजस मार्क-1A पर विराम लगी अटकलें: HAL बोला—पांच लड़ाकू विमान वायुसेना को सौंपने को तैयार
- तेजपुर: रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी पाकिस्तानी एजेंटों से संपर्क के आरोप में गिरफ्तार
- सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए वायुसेना का बड़ा कदम: संवेदनशील इलाकों में युद्धाभ्यास का ऐलान
- नासिक से उड़ान भरेगा तेजस मार्क-1ए, वायुसेना को जल्द मिलेंगे दो नए स्वदेशी लड़ाकू विमान
0:00 left
भारतीय वायुसेना का मिग-21 आज रिटायर, 62 साल का गौरवशाली सफर हुआ समाप्त
भारतीय वायुसेना का दिग्गज लड़ाकू विमान मिग-21 आज औपचारिक रूप से रिटायर हो रहा है। चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन से अपने सफर की शुरुआत करने वाले इस विमान को विदाई भी यहीं से दी जाएगी।
युद्धों का गेमचेंजर और विवादों का केंद्र
मिग-21 ने 1965 के भारत-पाक युद्ध से लेकर 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक तक भारतीय वायुसेना के कई अहम अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1971 के युद्ध में यह गेमचेंजर साबित हुआ, 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में अपनी क्षमता दिखाई, और पाकिस्तान नेवल एयर आर्म के अटलांटिक विमान को मार गिराकर इतिहास रचा। 2019 के पुलवामा हमले के बाद हुई एयर स्ट्राइक में भी मिग-21 ने अहम योगदान दिया, जब विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने इसी विमान से उड़ान भरकर दुश्मन का मुकाबला किया। मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में भी इसे अलर्ट मोड पर रखा गया था।
गौरव के साथ बदनामी भी
जहां मिग-21 ने युद्ध के मैदान में अपनी ताकत साबित की, वहीं इसे “उड़ता ताबूत” और “विडो मेकर” जैसे उपनामों से भी बदनाम किया गया। साल 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए इस विमान को रूस ने लगभग 40 साल की उम्र के लिए डिजाइन किया था, लेकिन भारतीय इंजीनियरों ने समय-समय पर अपग्रेड करके इसकी सेवा अवधि 62 साल तक बढ़ाई।
दुर्घटनाओं का लंबा इतिहास
तकनीकी खामियों, मेंटेनेंस की चुनौतियों और मानवीय त्रुटियों के चलते मिग-21 कई दुर्घटनाओं का शिकार हुआ। अब तक इसके 490 से अधिक हादसे दर्ज किए गए हैं, जिनमें 200 से ज्यादा पायलटों ने अपनी जान गंवाई। तेज रफ्तार में कम विजिबिलिटी, बर्ड हिट और रनवे पर विफलता जैसी समस्याएं कई हादसों की वजह बनीं।
62 साल के इस अद्भुत सफर के बाद आज मिग-21 भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक गौरवशाली किंतु दर्दनाक अध्याय के रूप में दर्ज हो रहा है।



