नई दिल्ली भारत की आगामी Census 2027 प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डिजिटल Self-Enumeration की सुविधा 2 अगस्त से शुरू हुई है और यह प्रक्रिया 16 अगस्त 2026 तक चलने वाली है। नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए Self-Enumeration ID दी जा रही है।
डिजिटल माध्यम से जनगणना संबंधी जानकारी जुटाने की यह प्रक्रिया भारत में जनगणना को अधिक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नागरिकों को निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर मिल रहा है।
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Self-Enumeration क्या है?
Self-Enumeration का मतलब है कि नागरिक निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित प्रक्रिया में इस जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने वाले लोगों को एक 11 अंकों की Self-Enumeration ID मिलती है। बाद में जब भौतिक स्तर पर हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया होगी, तो इस ID का इस्तेमाल संबंधित जानकारी को जोड़ने के लिए किया जा सकता है।
2027 की जनगणना क्यों महत्वपूर्ण?
जनगणना देश की आबादी से जुड़े आंकड़ों का सबसे बड़ा आधिकारिक स्रोत होती है। सरकार और प्रशासन विभिन्न योजनाओं, संसाधनों, बुनियादी सुविधाओं और नीतिगत फैसलों के लिए जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल करते हैं।
डिजिटल प्रक्रिया के बढ़ते इस्तेमाल से जनगणना के दौरान डेटा संग्रह और प्रबंधन को आधुनिक बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, डिजिटल व्यवस्था के साथ यह भी जरूरी है कि नागरिकों को प्रक्रिया की सही जानकारी मिले और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
असम के कुछ जिलों में अलग स्थिति
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ की परिस्थितियों के कारण असम के सिवसागर और चराइदेव जिलों में Self-Enumeration से जुड़ी प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। यह उदाहरण बताता है कि जनगणना जैसी बड़ी प्रक्रिया को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करना भी आवश्यक है।
Census 2027 को लेकर आने वाले दिनों में डिजिटल प्रक्रिया, हाउस-लिस्टिंग और जनगणना से जुड़े अन्य चरणों पर लोगों की नजर रहेगी।
आप क्या सोचते हैं? क्या डिजिटल जनगणना से लोगों का समय बचेगा और सरकारी आंकड़े ज्यादा तेजी से तैयार हो सकेंगे? कमेंट में अपनी राय बताएं।



