फिल्म समीक्षा- धुरंधर 2 : अतीक से लेकर नोटबंदी तक

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार
धुरंधर की ही तरह ‘धुरंधर 2 : द रिवेंज’ भी एक जासूसी,एक्शन, एजेंडा,थ्रिलर है, जो भारतीय दर्शक की आत्मा को यह आनंददायक अहसास कराती है कि यह वो नया भारत है, जो न केवल घर में घुसता है, बल्कि मारता भी है। वह भोपालियों की तरह गाली को शॉर्ट में माकोड़ा नहीं बोलता, पूरी की पूरी गाली देता है। इतना ही नहीं, वह बकोड़ा भी बोलता है और शरीर के ख़ास प्रजनन अंगों को गाली की तरह इस्तेमाल करता है।
इस फिल्म की कहानी में टर्न और ट्विस्ट बार-बार हैं, मैं उन्हें नहीं बताऊंगा, लेकिन फिल्म के मिजाज़ की बात ज़रूर करूँगा।
पिछली धुरंधर की तरह इसमें हिंसा का अतिरेक है। आखिरी मौके पर फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कई दृश्यों और ‘श्लोकों’ को कटवा दिया फिर भी फिल्म 229 मिनट की है यानी 3 घंटे 49 मिनट की। देखने जाओ तो पानी-पेशाब के बाद ही जाइए।
18 मार्च को इसका पेड प्रीमियर था, इंदौर के पीवीआर इन्सिग्निया में टिकट मात्र 1100 रुपये था। गुड़ी पाड़वा पर लगने वाली इस फिल्म से बॉक्स ऑफिस के सोये हुए देव उठेंगे, फिल्मों का बाज़ार फिर गुलज़ार होने की उम्मीद है। फिर ईद भी इसी हफ्ते है।
2019 की चुनाव प्रचार रैलियों में मोदीजी ने कहा था – “घर में घुसकर मारेंगे”,“नई नीति और नया भारत” और “आतंकवाद को उसके घर में घुसकर जवाब दिया जाएगा”। इन अलग-अलग बयानों को मिलाकर एक पावरफुल ‘वन-लाइनर’ बना दिया : “अब ये वो भारत है, जो घर में घुसकर मारता है”। फिल्म की भी यही थीम है।
मोदी जी के सत्ता में आने के बाद हमारे जासूसी एजेंटों ने पाकिस्तान के दहशतगर्दों को चुन चुन कर मारा। मारा भी ऐसे कि बंदूक हाथ में होने के बावजूद किसी का गला रेता, किसी का हाथ काटा, किसी की टांग काटी, कइयों को जिन्दा जला दिया, और तो और जान लेने के पहले उसको भाषण भी पिला दिया कि अब ये भारत है, जो घर में घुसकर मारता है। ले अब मर साले !
इसका हीरो ग़दर फिल्म के हीरो से ज्यादा तबाही करता है और अपनी पाकिस्तानी बीवी को इंडियन एजेंट होने का पता चलने पर समझा भी देता है कि हमारी दुश्मनी पाकिस्तान की अवाम से नहीं, दहशतगर्दों से है मेरी प्यारी बीवी यालीना !बेचारी यालीना तो जमाली के बच्चे की मां बन चुकी है! क्या करती !
फिल्म समझाती है कि भारत की कई समस्याएं पाकिस्तान के कारण हैं। कश्मीर, पंजाब, पूर्वोत्तर की हिंसा, युवाओं में नशे की लत, देश में कई जगह अराजकता, आतंकी घटनाएं, मुस्लिम कट्टरवाद, सांप्रदायिक तनाव, नक्सली समस्या आदि। हजारों करोड़ के नकली नोट छापकर नेपाल के रास्ते भारत भेजे जा रहे थे, जिनसे आतंक और ड्रग्स का कारोबार फैलाया जा सके।
अतीक मियां जैसे गुंडे पाकिस्तान की शह पर अपना साम्राज्य जमाये हुए थे, 60,000 करोड़ और भेजे जा रहे थे जिससे यूपी में उनकी सरकार बन सके, तभी दुनियाभर के लोग देखते हैं कि टीवी पर भारत के पीएम का भाषण चल रहा है और नोटबंदी का ऐलान हो जाता है। पाकिस्तान के इरादे टांय टांय फिस्स।
फिल्म बताती है कि हमारे जासूस भी क्या कोई छोटे करमचंद हैं? वे दशकों से पाकिस्तान में हैं , पर स्लीपर सेल की तरह हैं। उन्हें हरी झंडी तब मिली जब नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने पीएम पद की शपथ ली।
पाकिस्तान के ‘उन लोगों’ ने मोदी को टीवी पर देखा और बोले -”हुँह, ये हमारा क्या उखाड़ लेगा?” लेकिन फिर भेड़िये की खाल वाले पाकी कहते हैं कि ये चायवाला तो घर में घुसकर मार रहा है। इसने तो यूपी भी हमारे हाथ से छीन लिया (मानो पहले यूपी को पाकिस्तान चला रहा था.) जो लोग पहले कह रहे थे कि हिन्दू बड़ी कमजोर कौम है, हम तो दिल्ली को नया इस्लामाबाद बनाएंगे, मर्दों का खतना कराएँगे और औरतों से हिजाब में कलमा पढ़वाएंगे, वे भारत माता की जय के नारे लगाने पर मज़बूर हो गए।
हमारे आईबी के चीफ सान्याल बने माधवन का एक डायलॉग है – ”हमने वो कर दिखाया है जिससे इस्लामाबाद की तशरीफ़ थरथरा गई है।”
दावा है कि फिल्म के अधकांश पात्र और घटनाएं वास्तविकता के करीब हैं। रणवीर सिंह हमज़ा अली मज़ारी बने हैं जो जसकीरत सिंह रांगी थे। अर्जुन रामपाल मेजर इकबाल बने, जो आईएसआई के इल्यास कश्मीरी थे। पूरी फिल्म के सूत्रधार अजित डोभाल के रूप में आर. माधवन हैं।
राकेश बेदी का जमील जमाली का किरदार नबील गबोल पर आधारित है।आदित्य उप्पल का रोल उमर शाहिद हामिद पर आधारित है। मशहूर अमरोही नवाब शफीक (नवाज़ शरीफ) के रूप में हैं।
रणवीर सिंह यानी हमजा अली मज़ारी ‘बड़े साहब’ को निपटने जाते हैं लेकिन निपटा नहीं पाते, क्योंकि….. और हां, दानिश इक़बाल ही बने हैं बड़े साहब! बड़े साहब यानी मुंबई की डोंगरी के डॉन… नाम तो आपने सुना ही होगा!
फिल्म बहुत लम्बी है, कहीं-कहीं डॉक्यूमेंट्री की फीलिंग आ जाती है। पुरानी देशप्रेम की फिल्मों के टेम्पलेट्स की जगह इस फिल्म ने जुमलों को टेम्पलेट्स की तरह वापरा है। फिल्म जगत के लोग इसे दस एनीमल के बराबर तो कोई शोले से सौ गुना पावरफुल कह रहा है। इसलिए देख ही डालो !

Ardhendu Bhushan - Consulting Editor
Ardhendu Bhushan - Consulting Editorhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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