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भोपाल…महापौर मालती राय ने अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश किया

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INDORE–मुस्लिम डॉक्टर पर लगा क्लीनिक पर आई युवती को बेहोश कर बलात्कार करने का आरोप….

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भोपाल… प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने काटजू अस्पताल का दौरा किया

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INDORE·आरटीओ परिसर को साइनाइड गैस बम से उड़ाने की धमकी निकली फर्जी…

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किसी मुगालते में मत रहना दद्दा, दतिया में आपने भाजपा को नहीं हराया!

दतिया उपचुनाव में भाजपा की बुरी तरह हार हुई है और कांग्रेस ने यहां कब्जा बरकरार रखा है। अब लोग भले ही कह रहे हों कि दद्दा यानी की पिछली विधानसभा में कांग्रेस से हारे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने के कारण भाजपा का यह हाल हुआ है, लेकिन इसके कारण अनेक हैं। जरा सोचिए कि आखिर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी खुद को सीएम मटेरियल समझने वाले नरोत्तम मिश्रा चुनाव कैसे हार गए? और जब हार गए तो उसके बाद दतिया की जनता के लिए क्या किया? यह तो सबको पता है कि दद्दा का टिकट दिल्ली से कटा था और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति थी। टिकट कटने का कारणों में दद्दा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, लोगों से खराब व्यवहार और सीएम की सवारी जैसे कई कारण शामिल हैं। जब बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा यानी उपचुनाव की नौबत आ गई, तब दद्दा फिर से ताल ठोंकने लगे। इधर, पार्टी ने मन बना लिया था कि इस बार दद्दा तो नहीं ही चलेंगे। दूसरी तरफ दद्दा खुद को भाजपा उम्मीदवार मानकर चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे, जब टिकट कटा तो दद्दा के साथ ही समर्थकों ने भी आंखें तरेरी। दद्दा ने भी कोशिश की, लेकिन जब लग गया कि कुछ होने वाला नहीं है तो फिर भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के समर्थन में उतर गए। फिर भी दद्दा दिल से यह बात स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। तभी तो आशुतोष तिवारी के नामांकन में उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। लोग इसे दद्दा समर्थकों के लिए संदेश भी मानते हैं। बाहर से दद्दा भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर एक आक्रोश की एक चिंगारी भी भड़क रही थी कि इस बार पार्टी आलाकमान को सबक सीखा ही देनी है। दतिया की इस हार से एमपी के दद्दा जैसे उन नेताओं की बांछें जरूर खिली होंगी, जिनसे पार्टी किनारा करना चाहती है। लेकिन, इससे पहले यह समझना होगा कि दतिया में हार की एकमात्र वजह दद्दा को टिकट देना नहीं है। दतिया दद्दा की थी ही नहीं। वो तो कांग्रेस के पास थी और कांग्रेस के पास रहने के दौरान दद्दा ने उस सीट को भाजपा का बनाने की कोशिश भी नहीं की। उल्टा गड्ढा ही खोदते रहे। ऐसे में दद्दा जैसे नेताओं के आंख तरेरने से कम से कम मध्यप्रदेश में भाजपा को डरने की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि ऐसे नेताओं के कारण ही कई विधानसभा क्षेत्रों में लंबे समय से मेहनत कर रहे कार्यकर्ता अब हताश हो रहे हैं। भाजपा को तो ऐसे सभी नेताओं को अब मार्गदर्शक मंडल में ही बिठा देना चाहिए और नए लोगों को मौका देना चाहिए। इससे जनता के बीच भी अच्छा संदेश जाएगा और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भी संतुष्ट होंगे। खैर, भाजपा इस हार की समीक्षा में जुट गई होगी। प्रदेश अध्यक्ष ने खेल बिगाड़ने वालों के खिलाफ एक्शन का भी ऐलान कर दिया है। जाहिर है कुछ ऐसा होगा, जो आगे के लिए दद्दा टाइप नेताओं के लिए सबक साबित होगा।

प्रशांत किशोर ने तोड़ा भाजपा का घमंड, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक बांकीपुर सीट पर उड़ाया गर्दा

कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने भाजपा का घमंड तोड़ दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को करारी शिकस्त दी है।

क्या दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना भाजपा को पड़ा भारी, कहीं फेल तो नहीं हो गया मोदी फॉर्मूला?

बिहार के बांकीपुर के बाद मध्यप्रदेश के दतिया में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना दतिया के लोगों को रास नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन दे दिया। इस चुनाव में हार के बाद भाजपा आलाकमान को भी अपने जबरदस्ती थोपे गए फैसलों पर सोचना होगा।

नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, गंभीर अपराध में शामिल लोगों को नहीं मिलेगी राहत

नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है- देखना होगा कि कितने एफआईआर हैं। उनमें से कितने ऐसे लोगों पर है जिनका आपराधिक इतिहास रहा है।
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