इंदौर। कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची को लेकर घमासान मचा हुआ है। सहकारिता विभाग के एक पूर्व उप अंकेक्षक आनंद पाठक विभाग के ही वर्तमान निरीक्षक संजय कूचनकर के साथ मिलकर यह पूरा खेल जमा रहे हैं। संस्था के सदस्यों से अधिकारियों के नाम पर जमकर वसूली हो रही है।
उल्लेखनीय है कि डीआर ने वर्षों से विवादित कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची फाइनल कर हाईकोर्ट में लगा दी। अब यह सूची इंदौर विकास प्राधिकरण के पास पहुंच गई है और हाईकोर्ट ने 24 नंवबर तक सूची के आधार पर प्लॉट बांटने को कहा है। इसको लेकर सहकारिता आयुक्त से डीआर को शिकायत की गई है। डीआर ने सूची फाइनल कर कोर्ट को तो दे दी, लेकिन यह नहीं बताया कि इसको लेकर कितने केस पेंडिंग है। ईओडब्ल्यू की जांच तक को छुपा लिया गया है।
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सदस्यों से राशि वसूलकर हो रही बंदरबांट
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पूर्व उप अकेक्षक आनंद पाठक है। उसने वरीयता सूची के लिए पूर्व डीआर को 40 लाख रुपए दिए थे। अब वर्तमान सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर को 20 लाख रुपए दिए हैं। संजय कूचनकर ने पुराने डीआर की बनाई सूची में छेड़छाड़ नहीं करने के एवज में वर्तमान डीआर को 12 लाख रुपए दिए। कूचनकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी आयुषी कूचनकर के नाम से प्लॉट भी लिया था, जिसकी शिकायत हुई थी। आनंद पाठक संस्था के सभी सदस्यों से 20 लाख रुपए प्रति प्लॉट की वसूली कर रहा है, जिसकी बंदरबांट भी हो रही है।
पाठक का दावा-24 नवंबर तक हो जाएगा काम
बताया जाता है कि आनंद पाठक यह दावा भी कर रहा है कि 24 नवंबर तक प्लॉट मिल जाएगा। पाठक का यह कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आईडीए सीईओ को इसी सूची के आधार पर प्लॉट देना ही होगा। बताया जाता है कि इस दावे के साथ पाठक ने वसूली में भी तेजी ला दी है। पाठक का यह भी कहना है कि आईडीए में भी बात हो चुकी है। इस पूरे खेल में पाठक के साथ कई बार जेल जा चुका एक भूमाफिया भी शामिल है।
शिकायतों की अपने स्तर पर जांच कर रहा आईडीए
जब वरीयता सूची को लेकर बवाल मचा तो आईडीए भी अब सतर्क हो गया है। आईडीए सीईओ ने भी अपने स्तर से पड़ताल शुरू कर दी है। बताया जाता है कि उन्होंने अपने विधि अधिकारी को पूरी जानकारी निकालने को कहा है। आईडीए सीईओ को संस्था के एक सदस्य बालेश चौरसिया ने भी शिकायत की है। इसमें सहकारिता विभाग से लेकर हाईकोर्ट में चल रहे प्रकरणों का हवाला दिया गया है।
सहकारिता आयुक्त भी हुए सतर्क
संस्था के एक सदस्य बालेश चौरसिया ने आयुक्त सहकारिता से डीआर की शिकायत की है। इसमें हाईकोर्ट के एक आदेश तथा अन्य प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि संस्था द्वारा प्रेषित वरीयता सूची के आधार पर प्लॉटों का आवंटन नहीं करें। चौरसिया ने इस सूची को अवैधानिक बताया है। शिकायत में इस संबंध में चल रहे सारे प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बाद भी उपायुक्त महोदय ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों से मिलीभगत कर सूची आईडीए को भेज दी है। सूत्र बताते हैं इस शिकायत के बाद अब सहकारिता आयुक्त भी सतर्क हो गए हैं। इस मामले में अब विभाग
संयुक्त आयुक्त की आपत्ति को भी किया दरकिनार
संयुक्त आयुक्त सहकारिता बीएल मकवाना के पत्र को भी अनदेखा कर दिया। भूमाफियाओं से मिलीभगत कर उपायुक्त ने कोर्ट के बहाने अब गेंद इंदौर विकास प्राधिकरण के पाले में डाल दी है। उल्लेखनीय है कि संयुक्त सहकारिता बीएल मकवाना ने कर्मचारीगण गृह निर्माण सहकारी संस्था की वरीयता सूची को लेकर उपायुक्त को 10 अक्टूबर 25 को एक पत्र भेजा था। इसमें उपायुक्त के 17 जून 25 के भेजे पत्र का हवाला दिया गया था। मकवाना ने अपने पत्र में संस्था के ऑडिट और सदस्यों की संख्या को लेकर आपत्ति उठाई थी। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त को सूची वापस कर दी थी।
ईओडब्ल्यू भी हो गया सक्रिय
इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई (ईओडब्ल्यू) में प्रकरण पंजीबद्ध है। ईओडब्ल्यू ने 23 सितंबर 25 को ही सुरेंद्र जैन सहकारी निरीक्षक इंदौर, एनके राठौर सेवानृवित्त वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक इंदौर, बीएल मकवाना, संयुक्त आयुक्त सहकारिता, इंदौर, राधेश्याम गरोठिया सहकारी निरीक्षक इंदौर सहित संस्था के सदस्यों को नोटिस जारी किया था। वरीयता सूची फाइनल करते समय इस केस का भी ध्यान नहीं रखा गया। अब शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू भी सक्रिय हो गया है।


