इस बार बिहार में विभागों के बंटवारे पर भारी पड़ी भाजपा, पहली बार गृह विभाग भी देने पर राजी हो गए नीतीश

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा ने इस बार मंत्रियों के विभागों में कोई समझौता नहीं किया है। इस बार गृह विभाग भी नीतीश कुमार ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दे दिया है। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते हुए यह पहला अवसर है जब उनके पास गृह विभाग नहीं होगा। इसके साथ ही कई और मलाईदार विभाग भी भाजपा के पास आ गए हैं।

नीतीश कुमार के मौजूदा कैबिनेट में भाजपा के 14, जेडीयू के 9, एलजेपी (आर) के 2, हम और आरएलडी के एकएक नेता को मंत्री बनाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन के साथसाथ ऐसे सभी विभाग की जिम्मेदारी है, जो किसी को आवंटित नहीं हुआ है। 89 सीटें लाकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा की ताकत इस बार मंत्रिमंडल में दिखाई दे रहा है। इस बार भाजपा गृह विभाग भी लेने में सफल रही है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इसे संभालेंगे। दूसरे उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के पास राजस्व एवं भूमि सुधार और खान एवं भूतत्व जैसे अहम विभाग आए हैं।

जदयू के बिजेंद्र यादव के पास वित्त, वाणिज्यकर, उर्जा, योजना विकास की जिम्मेदारी दी गई। विजय चौधरी को जल संसाधन, भवन निर्माण और संसदीय कार्य विभाग सौंपा गया है। इसके अलावा अशोक चौधरी को ग्रामीण कार्य विभाग, सुनील कुमार को शिक्षा विभाग की जम्मेदारी सौंपी गई है। ये सभी ऐसे विभाग हैं, जिसे राज्य के विकास के दृष्टिकोण को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रवण कुमार को ग्रामीण विकास, विजय चौधरी को जल संसाधन विभाग दिया गया है। अशोक चौधरी को ग्रामीण कार्य विभाग का मंत्री बनाया गया है। दिलीप जायसवाल को उद्योग विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा लोजपा (आर) को गन्ना उद्योग विभाग और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग सौंपा गया है। हम पार्टी को लघु जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। आरएलएम को पंचायती राज विभाग दिया गया है।

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