इंदौर। कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची को लेकर घमासान मचा हुआ है। सहकारिता विभाग के एक पूर्व उप अंकेक्षक आनंद पाठक डीआर और एक निरीक्षक के साथ मिलकर पूरा खेल जमा रहे हैं। इस पूरे मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की आपत्ति के साथ ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई (ईओडब्ल्यू) की जांच को भी दरकिनार कर दिया गया है। अब ईओडब्ल्यू ने शुक्रवार 21 नवंबर को इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के सीईओ को एक पत्र भेजा है। इसमें 27 नवंबर तक सारी जानकारी भोपाल मंगवाई गई है।
उल्लेखनीय है कि डीआर ने वर्षों से विवादित कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची फाइनल कर हाईकोर्ट में लगा दी। अब यह सूची इंदौर विकास प्राधिकरण के पास पहुंच गई है और हाईकोर्ट ने 24 नंवबर तक सूची के आधार पर प्लॉट बांटने को कहा है। इसको लेकर सहकारिता आयुक्त से डीआर को शिकायत की गई है। डीआर ने सूची फाइनल कर कोर्ट को तो दे दी, लेकिन यह नहीं बताया कि इसको लेकर कितने केस पेंडिंग है। उपायुक्त ने ईओडब्ल्यू की जांच तक को छुपा लिया।
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पूरे खेल का मास्टरमाइड पूर्व उप अंकेक्षक पाठक
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पूर्व उप अकेक्षक आनंद पाठक है। उसने वरीयता सूची के लिए पूर्व डीआर को 40 लाख रुपए दिए थे। अब वर्तमान सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर को 20 लाख रुपए दिए हैं। संजय कूचनकर ने पुराने डीआर की बनाई सूची में छेड़छाड़ नहीं करने के एवज में वर्तमान डीआर को 12 लाख रुपए दिए। कूचनकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी आयुषी कूचनकर के नाम से प्लॉट भी लिया था, जिसकी शिकायत हुई थी। आनंद पाठक संस्था के सभी सदस्यों से 20 लाख रुपए प्रति प्लॉट की वसूली कर रहा है, जिसकी बंदरबांट भी हो रही है।
ईओडब्ल्यू पहले से ही कर रहा जांच
इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई (ईओडब्ल्यू) में प्रकरण पंजीबद्ध है। ईओडब्ल्यू ने 23 सितंबर 25 को ही सुरेंद्र जैन सहकारी निरीक्षक इंदौर, एनके राठौर सेवानृवित्त वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक इंदौर, बीएल मकवाना, संयुक्त आयुक्त सहकारिता, इंदौर, राधेश्याम गरोठिया सहकारी निरीक्षक इंदौर सहित संस्था के सदस्यों को नोटिस जारी किया था। वरीयता सूची फाइनल करते समय इस केस का भी ध्यान नहीं रखा गया।
आईडीए से मांगी वरीयता सूची की जानकारी
ईओडब्ल्यू ने आईडीए सीईओ को इस संबंध में शुक्रवार 21 नवंबर को एक पत्र भेजा है। इसमें शिकायत क्रमांक- 261/19 में दस्तावेज मांगे गए हैं। इसके साथ ही कहा गया है कि उपरोक्त जानकारी/दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर 27 नवंबर तक कार्यालय पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, तृतीय तल, इकाई भोपाल ई.ओ.डब्ल्यू, भवन, 42 अरेरा हिल्स भोपाल में उपलब्ध कराने का कष्ट करें।
ईओडब्ल्यू ने क्या-क्या जानकारी मांगी
1.कर्मचारीगण गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. इंदौर मप्र के संबंध में उपायुक्त/जिला पंजीयक सहकारिता, इंदौर से वर्तमान में प्राप्त सदस्यता सूची का विवरण।
2. उक्त संस्था के संबंध में उपायुक्त/जिला पंजीयक सहकारिता इंदौर द्वारा पूर्व में भेजी गई सदस्यता सूची का विवरण।
3 . उक्त कर्मचारीगण गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. इंदौर मप्र द्वारा किस सदस्य की ओर से राशि आपके कार्यालय में पूर्व में एवं वर्तमान में जमा कराई गई है, का संपूर्ण विवरण।
सहकारिता आयुक्त को भी भ्रम रखने की कोशिश
संस्था के एक सदस्य बालेश चौरसिया ने आयुक्त सहकारिता से डीआर की शिकायत की है। इसमें हाईकोर्ट के एक आदेश तथा अन्य प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि संस्था द्वारा प्रेषित वरीयता सूची के आधार पर प्लॉटों का आवंटन नहीं करें। चौरसिया ने इस सूची को अवैधानिक बताया है। शिकायत में इस संबंध में चल रहे सारे प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बाद भी उपायुक्त महोदय ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों से मिलीभगत कर सूची आईडीए को भेज दी है। सूत्र बताते हैं इस शिकायत के बाद अब सहकारिता आयुक्त भी सतर्क हो गए हैं।
संयुक्त आयुक्त ने भी उठाई थी आपत्ति
संयुक्त आयुक्त सहकारिता बीएल मकवाना के पत्र को भी अनदेखा कर दिया। भूमाफियाओं से मिलीभगत कर उपायुक्त ने कोर्ट के बहाने अब गेंद इंदौर विकास प्राधिकरण के पाले में डाल दी है। उल्लेखनीय है कि संयुक्त सहकारिता बीएल मकवाना ने कर्मचारीगण गृह निर्माण सहकारी संस्था की वरीयता सूची को लेकर उपायुक्त को 10 अक्टूबर 25 को एक पत्र भेजा था। इसमें उपायुक्त के 17 जून 25 के भेजे पत्र का हवाला दिया गया था। मकवाना ने अपने पत्र में संस्था के ऑडिट और सदस्यों की संख्या को लेकर आपत्ति उठाई थी। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त को सूची वापस कर दी थी। उपायुक्त ने इसका जवाब 4 नवंबर 25 को संयुक्त आयुक्त को भेजा। बताया जाता है कि उपायुक्त यह सारी कवायद हाईकोर्ट से छुपा गए और वरीयता सूची भेज दी।
सदस्यों से खुलेआम हो रही वसूली
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पूर्व उप अकेक्षक आनंद पाठक है। उसने वरीयता सूची के लिए पूर्व डीआर को 40 लाख रुपए दिए थे। अब वर्तमान सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर को 20 लाख रुपए दिए हैं। संजय कूचनकर ने पुराने डीआर की बनाई सूची में छेड़छाड़ नहीं करने के एवज में वर्तमान डीआर को 12 लाख रुपए दिए। कूचनकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी आयुषी कूचनकर के नाम से प्लॉट भी लिया था, जिसकी शिकायत हुई थी। आनंद पाठक संस्था के सभी सदस्यों से 20 लाख रुपए प्रति प्लॉट की वसूली कर रहा है, जिसकी बंदरबांट भी हो रही है।


