बेंगलुरु रिपोर्ट में E20 में मिला 30% से ज्यादा एथेनॉल को लेकर विवाद गरमाया हुआ है। कर्नाटक सरकार की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कई जिलों के पेट्रोल सैंपलों में निर्धारित 20% से अधिक एथेनॉल मिला है। इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कर्नाटक सरकार की लैब जांच में E20 में अधिक एथेनॉल पाया गया
कर्नाटक सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने राज्य के सात जिलों से E20 पेट्रोल के 63 सैंपल एकत्रित किए। इनमें से 14 सैंपलों की जांच बेंगलुरु के NABL-मान्यता प्राप्त श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में कराई गई। रिपोर्ट में 11 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 20% सीमा से अधिक पाई गई। खासतौर पर इंडियन ऑयल के सैंपल में 31.2% और हिंदुस्तान पेट्रोलियम में 30.5% तक एथेनॉल मिला।
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राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर E20 पेट्रोल विवाद में उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 7 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल के नाम पर जनता को असली पेट्रोल से कम मात्रा मिल रही है। उन्होंने इसे “E20 बना 420” करार दिया और कहा कि गाड़ियों के माइलेज में गिरावट आ रही है तथा वाहन बार-बार खराब हो रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से पूछा कि इस धोखाधड़ी पर कब कार्रवाई होगी।
तेल कंपनियों ने आरोपों को ठुकराया और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने एक संयुक्त बयान जारी कर आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि उनका E20 पेट्रोल BIS के IS 17021 मानक के अनुसार है। तेल कंपनियों ने कहा कि कर्नाटक सरकार की जांच प्रक्रिया तकनीकी और वैधानिक मानकों के खिलाफ थी। उन्होंने दोबारा जांच कराने का प्रस्ताव भी रखा है।

कर्नाटक सरकार ने ओवर-ब्लेंडिंग पर जुर्माने और मुआवजे की मांग की
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने कंपनियों द्वारा तय सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाने पर जुर्माने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित उपभोक्ताओं को मुआवजा देने की भी बात कही गई। कर्नाटक सरकार का तर्क है कि ओवर-ब्लेंडिंग से वाहन माइलेज में गिरावट हुई है और इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
E20 पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा और आम आदमी पर असर
E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना मानक है, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहतर माना जाता है। हालांकि, 30% से अधिक एथेनॉल मिलाने से इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। आम लोगों को इससे वाहन खराबी, माइलेज में कमी और अधिक खर्च का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस विवाद का सीधा असर जनता की जेब और वाहन पर पड़ना संभावित है।
आगे की संभावनाएं और इस विवाद का राजनीतिक प्रभाव
यह विवाद आगामी समय में पेट्रोलियम उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी के लिए सख्ती बढ़ाने का अवसर बन सकता है। राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा केंद्र सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है क्योंकि विपक्ष इसे जनता के हित का मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है। दोनों पक्षों के बीच जांच प्रक्रिया और जवाबदेही पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।



