चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची संशोधन के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-6 को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से सवाल उठाए कि पता बदलने पर फॉर्म-6 क्यों जरूरी बन गया है। यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें फॉर्म-6 और उससे जुड़े नियमों तथा चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं की वैधता पर विवाद है।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर CJI सूर्यकांत का रुख
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार के संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने चुनाव आयोग से फॉर्म-6 में बदलाव के आदेश या प्राधिकारी की जानकारी मांगी है। यह सवाल इसलिए उठाया गया क्योंकि निर्वाचन आयोग ने ऑनलाइन पोर्टल ECINET पर एक नया खंड जोड़ा था, जिसमें आवेदकों के माता-पिता या पूर्वजों का पिछला विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवरण अनिवार्य कर दिया गया।
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चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में संशोधन से किया इनकार
निर्वाचन आयोग का तर्क है कि मुख्य वैधानिक फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग ने कहा कि केवल SIR प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया था, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फॉर्म के साथ दिखाया गया। हालांकि, आयोग ने इस बात को स्वीकार किया कि इस प्रस्तुति से ऐसा लग सकता था कि फॉर्म-6 में संशोधन किया गया है। 21 अक्टूबर से फॉर्म और अतिरिक्त घोषणा पत्र को अलग-अलग प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गई है।
फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के बीच विवाद का केंद्र बिंदु
मतदाता नियमों के तहत पता बदलने या प्रविष्टियों में सुधार के लिए सामान्यतः फॉर्म-8 का उपयोग होता है। लेकिन SIR के दौरान नए नियमों के कारण प्रभावित या नए मतदाता फॉर्म-6 और उसके अतिरिक्त घोषणापत्र भरने के लिए बाध्य हुए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों का उल्लंघन है और बिना नियमों में संशोधन के फॉर्म के साथ अतिरिक्त शर्तें जोड़ी गईं।

याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी सहित याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड और फाइल नोटिंग्स की जांच की मांग की। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग के महत्वपूर्ण फैसले सभी आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे या नहीं, यह सुनिश्चित होना चाहिए। इसके अलावा, फॉर्म-6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणापत्र की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को दिया आश्वासन
26 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह आश्वासन दिया कि अगर कोई मतदाता अपने पते में बदलाव या पुनर्विकास के कारण हटाए गए हैं, तो वे फॉर्म-6 भरकर पुनः पंजीकरण करा सकते हैं और इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह निर्णय मतदाताओं के लिए राहत लेकर आया है।
आगे की सुनवाई में क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने आगामी सुनवाई 17 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। इस सुनवाई में चुनाव आयोग को याचिकाकर्ताओं के सवालों का जवाब देना होगा और फॉर्म-6 में बदलाव की कानूनी वैधता पर गहन जांच होगी। इसके अलावा, आयोग के आंतरिक निर्णयों के रिकॉर्ड भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। इस फैसले का असर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों पर पड़ सकता है।



