भारत ने अमेरिका में हिंदू मंदिर हमले की साजिश पर गहरी चिंता जताई है। यह घटना इलिनॉय राज्य के ऑरोरा इलाके में हुई जहां एक 19 वर्षीय अमेरिकी नागरिक एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस पर हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की योजना बनाने का आरोप लगा है। आरोपी के खिलाफ आतंकवादी धमकी और अवैध हथियार रखने के मामले दर्ज किए गए हैं।
अमेरिका में हिंदू मंदिर हमले की साजिश का खुलासा
11 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस को गिरफ्तार किया। वह ऑरोरा स्थित एक बड़े हिंदू मंदिर में गोलीबारी की कोशिश कर रहा था। हालांकि उसकी राइफल जाम हो गई, जिसके कारण वह हमला नहीं कर सका। इस नाकाम साजिश के पीछे नस्लवादी और हिंदू-विरोधी विचारधारा को माना जा रहा है।
पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से एक राइफल, कई भरी हुई मैगजीन, सैकड़ों कारतूस, बॉडी आर्मर और श्वेत वर्चस्ववादी सामग्री बरामद की। इसके अलावा आठ पन्नों का एक मेनिफेस्टो मिला जिसमें भारतीय, यहूदी और अफ्रीकी-अमेरिकी समुदायों के खिलाफ नफरत भरे शब्द थे।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया और चिंता
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस हिंदू मंदिर हमले की साजिश पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे हिंदू-विरोधी, नस्लवादी और भारत-विरोधी नफरत से प्रेरित बताया। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सरकार से दोषियों को सख्त सजा दिलाने और भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
जयसवाल ने कहा, “यह घटना अमेरिका में नस्लीय और धार्मिक नफरत के बढ़ते मामलों को दर्शाती है। हमें उम्मीद है कि अमेरिकी जांच एजेंसियां पूरी जांच करेंगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाएंगी।”
अमेरिकी जांच एजेंसियों की भूमिका और कार्रवाई
एफबीआई और स्थानीय पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच में आरोपी द्वारा रखे गए हथियार और नफरत भरे दस्तावेजों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं इस साजिश में और कोई भी व्यक्ति शामिल तो नहीं।
पुलिस ने आरोपी को अदालत में प्रस्तुत किया है और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले के सभी पहलू सामने आएंगे।

हिंदू समुदाय और स्थानीय लोगों की सुरक्षा की अपेक्षा
इस घटना ने अमेरिका में हिंदू समुदाय में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई संगठन और स्थानीय नेता सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा कड़ी की जाए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
भारत सरकार भी अमेरिकी अधिकारियों से भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह कर रही है। यह घटना धार्मिक सद्भाव और समुदायों के बीच भाईचारे के लिए खतरा मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में इस घटना का महत्व
अमेरिका में इस तरह की हिंसात्मक घटनाएं नस्लीय और धार्मिक तनाव को बढ़ावा देती हैं। भारत ने इस साजिश को विश्व स्तर पर नस्लवाद और भारत-विरोधी नफरत की चेतावनी माना है।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि विदेशी धरती पर भारतीय मूल के लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहना होगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी ऐसी घटनाओं के खिलाफ सहकारी और कड़े कदम उठाने होंगे।
आगे की संभावनाएं और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
जांच एजेंसियां आरोपी के कनेक्शन और साजिश के अन्य पहलुओं की जांच कर रही हैं। इसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, अमेरिका में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर नई नीतियां बनाई जा सकती हैं। धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए तकनीकी और मानव संसाधन दोनों का इस्तेमाल जरूरी होगा। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।



