सिंधिया परिवार संपत्ति विवाद में प्रतिमा देवी को अब अदालत में अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा। यह मामला ग्वालियर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा है, जहां 29 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई निर्धारित है।
सिंधिया परिवार संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि और संपत्ति का मूल्य
सिंधिया परिवार संपत्ति विवाद में कुल संपत्ति का मूल्य लगभग ₹41,000 करोड़ आंका गया है। यह विवाद मुख्य रूप से इस संपत्ति के बंटवारे को लेकर उत्पन्न हुआ है। ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की यह विशाल संपत्ति कई पीढ़ियों से परिवार के सदस्यों के बीच विवाद का विषय बनी हुई है।
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इस संपत्ति में जमीन, अचल संपत्ति, उद्योग और अन्य आर्थिक हित शामिल हैं, जिनका बंटवारा पहले एक समझौते के तहत किया जाना था।

प्रतिमा देवी की आपत्ति और आरोप
प्रतिमा देवी राणा, जो दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी और जीवाजीराव सिंधिया की नातिन हैं, ने इस संपत्ति बंटवारे के समझौते पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि इस समझौते पर उनसे दबाव और धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराए गए।
प्रतिमा देवी ने संपत्ति में अपनी 10% हिस्सेदारी की मांग की है और इसे लेकर उन्होंने अदालत में अपनी आपत्ति जताई है। वे इस मामले में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए साक्ष्य पेश करेंगी।
विरोधी पक्ष का रुख और उनके तर्क
मामले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे, और उषा राजे पक्षकार हैं। उनका कहना है कि संपत्ति बंटवारे का समझौता आपसी सहमति से हुआ था।
वे प्रतिमा देवी के आरोपों को खारिज करते हुए दावा करते हैं कि कोई दबाव या धोखाधड़ी नहीं हुई। इस कारण वे इस समझौते को वैध मानते हैं और अदालत में इसका पक्ष रख रहे हैं।
अदालत की कार्रवाई और 14 अक्टूबर 2026 की सुनवाई
ग्वालियर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश आत्माराम टांक ने 14 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में प्रतिमा देवी के आवेदन पर फैसला सुनाते हुए उन्हें निर्देश दिए कि वे अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करें।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस साक्ष्य के आरोपों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से मामला और गंभीर हो गया है तथा दोनों पक्षों की तैयारियों में तेजी आई है।
29 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें
अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 29 अक्टूबर 2026 तय की है, जब प्रतिमा देवी को अपनी गवाही दर्ज करनी होगी और अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश करने होंगे।
इस सुनवाई में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगी। यदि प्रतिमा देवी के साक्ष्य मजबूत पाए गए तो समझौते की वैधता पर सवाल उठ सकता है।
सिंधिया की राजनीतिक छवि पर पड़ सकता है असर
यह संपत्ति विवाद केवल एक पारिवारिक मामला नहीं है, बल्कि इसके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव व्यापक हैं। ₹41,000 करोड़ की संपत्ति के बंटवारे में देरी से स्थानीय उद्योगों और रोजगार पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, इस विवाद के कारण सिंधिया परिवार की राजनीतिक छवि भी प्रभावित हो सकती है, जो क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस मामले की सुनवाई पर आम जनता की भी निगाहें बनी हुई हैं।



