राहुल गांधी ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा, इस बात की घोषणा की है। यह मार्च विपक्ष के नेतृत्व में होगा और इसका उद्देश्य देश के मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपना है। इस घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान और उसका मकसद
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की। इस मार्च का मुख्य मकसद चुनाव आयोग से जुड़े SIR प्रक्रिया को रोकना, वोट चोरी के आरोपों को समाप्त कराना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना है। कांग्रेस सांसद ने देश के सभी वर्गों, समुदायों और राज्यों के लोगों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है।
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10 अक्टूबर के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
राहुल गांधी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर हुई पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं की मारपीट की निंदा की है। उनका कहना है कि यह भारत के लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से युवाओं की आवाज दबाई नहीं जा सकती।
INDIA गठबंधन की राष्ट्रपति से मुलाकात
इस मार्च से पहले, 10 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने चुनावी गड़बड़ियों पर एक ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। यह कदम विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदिश सी. अग्रवाल ने राहुल गांधी से इस मार्च को रद्द करने की अपील की है। उनका मानना है कि इस तरह का मार्च न्यायपालिका पर अवांछित दबाव डाल सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में भले ही विरोध जरूरी है, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
मार्च के दौरान रखी जाने वाली प्रमुख मांगें
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को रोकना।
वोट चोरी के आरोपों को समाप्त करना।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
ईवीएम हटाने की मांग।
राहुल गांधी ने कहा कि ये मांगें लोकतंत्र के संरक्षण के लिए आवश्यक हैं और देश के सभी नागरिकों को इसमें भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
विपक्ष और सरकार के बीच टकराव
इस विरोध मार्च और उससे जुड़ी राजनीतिक हलचल का आम जनता पर भी असर हो सकता है। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग से लोकतंत्र मजबूत होगा। वहीं, विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बीच तनाव बढ़ने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में शांति और समझदारी से काम लेना आवश्यक है ताकि लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाएं सुरक्षित रह सकें।
इस तरह पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा, यह आंदोलन लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। विपक्ष का यह प्रयास चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने का संदेश देता है।



