80 वर्ष की उम्र में पदयात्रा और उम्र पर तंज करने वालों के सवालों के जवाब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने अपनी आगामी “सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा” की रूपरेखा और उद्देश्य बताते हुए कहा कि उम्र केवल एक संख्या है और वे खुद को 50 वर्ष का महसूस करते हैं। इस पदयात्रा का मकसद सनातन धर्म की सच्ची भावना को जन-जन तक पहुंचाना है।
दिग्विजय सिंह की पदयात्रा का रास्ता और समय
दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे के दिन मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर से अपनी पदयात्रा शुरू करेंगे। यह यात्रा उत्तर प्रदेश के अयोध्या रामधाम तक जाएगी, जिसकी दूरी लगभग 910 किलोमीटर है। इस लंबी यात्रा में वे सनातन धर्म की मूल भावना को पुनः स्थापित करने का प्रयास करेंगे।
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उम्र पर तंज का दिग्विजय सिंह का करारा जवाब
80 वर्ष की उम्र में इतनी लंबी पदयात्रा के लिए दिग्विजय सिंह ने कहा, “A man is as old as he feels” यानी इंसान उतना ही बूढ़ा होता है जितना वह महसूस करता है। उन्होंने कहा कि वे खुद को 50 वर्ष का महसूस करते हैं और यदि उन्हें ऐसा महसूस करने में आनंद आता है, तो किसी को इसमें आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस जवाब से उनकी ऊर्जा और उद्देश्य स्पष्ट होता है।
पदयात्रा का उद्देश्य और राजनीतिक संदर्भ
दिग्विजय सिंह ने बताया कि यह पदयात्रा धर्म के नाम पर राजनीतिक हित साधने और चंदा वसूलने वालों के खिलाफ एक वैचारिक अभियान है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन संगठनों ने हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म की सच्ची भावना को बिगाड़ा है और देश में धार्मिक विभाजन पैदा किया है।
राम मंदिर और चंदे में कथित हेराफेरी
उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण और चढ़ावे के नाम पर लगभग 200 से 300 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है। इस धन का उपयोग बीजेपी-आरएसएस के दफ्तर बनाने और चुनाव प्रचार में किया गया। इस आरोप ने राजनीतिक बहस को और भी तेज कर दिया है।
‘हिंदू’ शब्द की उत्पत्ति पर दिग्विजय सिंह की टिप्पणी
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वेद, उपनिषद या अन्य प्राचीन धर्मग्रंथों में ‘हिंदू’ शब्द का कोई उल्लेख नहीं है। यह मूल रूप से एक फारसी शब्द है। उनका यह बयान सनातन धर्म और हिंदुत्व के बीच के अंतर को स्पष्ट करने की कोशिश है।
पदयात्रा के आगे संभावित प्रभाव और प्रतिक्रिया
यह पदयात्रा न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि आम जनता में भी इसके प्रभाव की उम्मीद है। यदि दिग्विजय सिंह अपने उद्देश्य में सफल होते हैं, तो इससे धार्मिक एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल, इस पदयात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं और आने वाले महीनों में इसकी व्यापक छवि सामने आएगी।



