रिश्वतखोरी मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के उप महानिदेशक मुदावथ देवुला को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी तमिलनाडु में हुई है और मामले की जांच को लेकर सीबीआई अब उनसे गहन पूछताछ करेगी। रिश्वतखोरी मामले में DGCA के उप महानिदेशक की गिरफ्तारी से जांच में नया मोड़ आया है।
DGCA के उप महानिदेशक मुदावथ देवुला पर रिश्वतखोरी के आरोप
रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्तार किए गए उप महानिदेशक मुदावथ देवुला पर आरोप है कि उन्होंने लंबित फाइलों को मंजूरी देने के एवज में 2.5 लाख रुपये की रिश्वत ली। यह रिश्वत ड्रोन आयात और नागरिक उड्डयन से जुड़ी अन्य मंजूरियों के लिए मांगी गई थी। आरोप है कि मुदावथ देवुला ने अपनी पदवी का दुरुपयोग कर निजी पक्षों से घूस स्वीकार की।
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सह-आरोपी के रूप में रिलायंस और एस्टेरिया के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल
जांच में पता चला है कि इस मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड से जुड़े वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारत माथुर भी सह-आरोपी हैं। दोनों पक्षों के बीच रिश्वतखोरी की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। यह रिश्वत ड्रोन से संबंधित फाइलों के निपटारे के लिए मांगी गई थी, जिससे उद्योग में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
सीबीआई की छापेमारी में जब्त हुई संपत्ति और डिजिटल उपकरण
सीबीआई ने दिल्ली समेत विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान 37 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के सिक्के और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। ये सबूत जांच में अहम साबित होंगे। छापेमारी से यह स्पष्ट हुआ कि रिश्वतखोरी का नेटवर्क काफी व्यापक था और इसमें कई लोग शामिल थे।
अप्रैल 2026 में भी हुई थी जांच और गिरफ्तारी
इस मामले में अप्रैल 2026 में भी पहले से ही कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया गया था। तब से मामले की जांच जारी है। अब उप महानिदेशक मुदावथ देवुला की गिरफ्तारी से जांच और गहराई से आगे बढ़ेगी। इससे भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर हो सकती हैं।
सीबीआई की ट्रांजिट रिमांड की मांग और आगे की कार्रवाई
तमिलनाडु में गिरफ्तारी के बाद सीबीआई उप महानिदेशक को दिल्ली लाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की मांग करेगी। इसके बाद उनसे लंबी पूछताछ होगी। जांच में और भी नाम सामने आ सकते हैं। सीबीआई की कार्रवाई से सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद है।
रिश्वतखोरी मामले का आम जनता पर प्रभाव
नागरिक उड्डयन क्षेत्र में रिश्वतखोरी से सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। ड्रोन तकनीक जैसे नए क्षेत्र में भ्रष्टाचार से विकास बाधित होता है। इसलिए इस मामले की जांच और सख्ती आम जनता के हित में है। इससे सरकारी विभागों में जवाबदेही स्थापित होगी।



