उज्जैन में महाकाल के द्वार पर इस बार 3.5 क्विंटल हल्दी से बनी 22 फीट ऊंची हरिद्रा गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। यह हरिद्रा गणेश गणेश उत्सव के दौरान भक्तों के दर्शन के लिए अवंतिका द्वार पर विराजमान होगा। हल्दी से बनी इस विशाल प्रतिमा ने पिछले वर्षों के विश्व रिकॉर्ड को भी चुनौती दी है।
महाकाल के द्वार पर हरिद्रा गणेश की स्थापना
गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच, महाकाल के द्वार पर इस बार 22 फीट की ऊंचाई वाली हरिद्रा गणेश प्रतिमा को खास तौर पर सजाया गया है। यह प्रतिमा करीब 3.5 क्विंटल हल्दी से बनाई गई है जो इसे अन्य पारंपरिक मूर्तियों से अलग बनाती है। महाकालेश्वर इंटरनेशनल चौराहे पर यह गणेश प्रतिमा भक्तों को आकर्षित कर रही है।
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हल्दी की प्राकृतिक रंगत और महत्तव के कारण गणेश की यह मूर्ति आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत मानी जा रही है।
गणेश उत्सव में हरिद्रा गणेश की भूमिका
हरिद्रा गणेश के रूप में विराजमान यह मूर्ति दस दिवसीय उत्सव में भक्तों की आस्था और श्रद्धा को नई दिशा देगी। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन यह प्रतिमा महाकाल के द्वार पर स्थापित की गई।
इस दौरान भक्त प्रतिमा के दर्शन कर अपने मनोकामनाएं मांगेंगे। हल्दी से बनी मूर्ति के कारण इसे शुभता और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है।
हल्दी से बनी प्रतिमा का सांस्कृतिक महत्व
हल्दी का प्रयोग भारतीय संस्कृति में सदियों से औषधि और पवित्रता के लिए होता आया है। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए इस बार हरिद्रा गणेश के निर्माण में हल्दी का उपयोग किया गया है।
यह मूर्ति न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनाई गई एक अनूठी कलाकृति भी है।
स्थानीय कलाकारों की मेहनत और तैयारी
इस विशाल हरिद्रा गणेश प्रतिमा के निर्माण में कई स्थानीय मूर्तिकारों ने कई महीनों तक मेहनत की है। हल्दी की गांठों को जोड़कर प्रतिमा का आकार दिया गया और फिर उसे सावधानी से सजाया गया।
मूर्ति निर्माण के दौरान कलाकारों ने पारंपरिक तकनीकों के साथ आधुनिक विधियों का भी सहारा लिया ताकि यह प्रतिमा टिकाऊ और आकर्षक बन सके।
भक्तों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था
गणेश उत्सव के दौरान महाकाल के द्वार पर स्थापित हरिद्रा गणेश के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भक्त दस दिनों तक प्रतिमा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं ताकि सभी श्रद्धालु आराम से दर्शन कर सकें।
हरिद्रा गणेश का भविष्य में प्रभाव
हल्दी से बनी इस 22 फीट ऊंची हरिद्रा गणेश प्रतिमा ने उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया है। आने वाले वर्षों में इस तरह की अनूठी मूर्तियों से उत्सवों की गरिमा बढ़ेगी।
यह पहल अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है जिससे सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिलेगा।



