खंडवा पुलिस ने 40 साल पुराने छेड़छाड़ मामले में 64 वर्षीय आरोपी अशोक कुमार को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब आरोपी लंबे समय से फरार था और जमानत मिलने के बाद कोर्ट में पेशी से लगातार गायब था। इस घटना ने यह साबित किया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और समय के साथ भी न्याय संभव है।
1986 में दर्ज हुआ था छेड़छाड़ का मामला
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के मोघट रोड थाना क्षेत्र में 1986 में एक युवती ने अशोक कुमार के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय अशोक कुमार की उम्र लगभग 24 वर्ष थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, लेकिन आरोपी पेशी से गायब हो गया।
इसके बाद अदालत ने अशोक कुमार के खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर दिया। तब से पुलिस उसकी तलाश में लगी थी।
पुलिस ने आरोपी के पुराने ठिकानों पर की छानबीन
पुलिस ने आरोपी की पहचान कर उसे पकड़ने के लिए कई जगहों पर छानबीन की। सबसे पहले पुलिस उसकी जलेबी चौक स्थित कटिंग की दुकान पर गई, जहां दुकान बंद मिली। इसके बाद संजय नगर स्थित उसके घर पर पहुंचा तो वहां भी ताला लगा था।
फिर टीआई विकास खिंची और हेड कांस्टेबल रफीक खान को मुखबिर से सूचना मिली कि अशोक कुमार बस स्टैंड के पास गन्ने की चरखी की दुकान पर रहता है। पुलिस ने तुरंत वहां दबिश दी और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
64 वर्ष की उम्र में गिरफ्तारी और पूछताछ
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब आरोपी से पुराने मामले के बारे में पूछा तो उसने कहा कि उसे याद नहीं है कि उसने किस युवती के साथ छेड़छाड़ की थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी को भूलने की बीमारी भी है।
अशोक कुमार की उम्र अब 64 वर्ष हो चुकी है और वह बुढ़ापे में भी पुराने अपराध के लिए जवाबदेह ठहराया गया है। कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।
40 साल बाद भी कानून की पकड़ मजबूत
यह मामला कानून के सख्त होने और पुलिस की तत्परता का उदाहरण है। 40 साल से फरार रहने के बाद भी आरोपी को पकड़कर न्यायालय के समक्ष लाना कानून व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
इस घटना से आम जनता में यह विश्वास बढ़ेगा कि न्याय पाने के लिए समय की कोई सीमा नहीं होती है।
छेड़छाड़ के मामलों में कानूनी प्रक्रिया का महत्व
छेड़छाड़ जैसे संवेदनशील मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सही पालन आवश्यक है। 40 साल बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि ऐसी घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जाता।
इस प्रकार के मामलों में पीड़ितों को हिम्मत कर केस दर्ज कराना चाहिए ताकि अपराधी को कानून के कटघरे में लाया जा सके।
आगे की कार्रवाई और सामाजिक प्रभाव
अब आरोपी अशोक कुमार के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा जारी रहेगा। पुलिस और न्यायपालिका इस मामले को गंभीरता से देख रही हैं।
इस घटना से समाज में भी एक संदेश जाएगा कि अपराध चाहे जितना पुराना हो, उसका दंड निश्चित है। इससे महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।



