इंदौर। मध्यप्रदेश सरकार के सबसे बड़बोले मंत्री की खासियत यह है कि वे अपनी वाणी पर कंट्रोल नहीं रख पाते। इसका उदाहरण विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान साफ दिखा। पहले तो उन्होंने सीएम के सूट-बूट पर टिप्पणी कर डाली। इसके बाद सदन में अपने पुराने ‘पार्टनर’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की तारीफ में कसीदे पढ़ डाले।
विधानसभा में विजयवर्गीय ने कहा कि वर्ष 1993 से 2003 तक मुख्यमंत्री के रूप में दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में राज्य के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट, बांध सागर परियोजना को गति देना तथा कोलार जल परियोजना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर में आईआईएम की स्थापना के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने विशेष प्रयास किए। इसी का परिणाम रहा कि इंदौर में आईआईएम और आईआईटी दोनों संस्थान स्थापित हुए। इंदौर देश का पहला ऐसा शहर है, जहां आईआईएम और आईआईटी दोनों मौजूद हैं, जिसमें अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह तथा तत्कालीन नेतृत्व का बड़ा योगदान रहा।
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गुरु बताने से भी नहीं चूके विजयवर्गीय
विजयवर्गीय ने सदन में यह भी कहा कि राजनीतिक सौजन्यता और मानवीय संवेदनाओं का पाठ उन्होंने दिग्विजय सिंह से सीखा है। उन्होंने एक व्यक्तिगत प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब उनके जबलपुर के कार्यकर्ता ओमकार तिवारी को अचानक स्वास्थ्य संकट आया, तब दिग्विजय सिंह ने तत्काल हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर उन्हें दिल्ली भिजवाया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का यह स्वभाव रहा है कि चाहे समर्थक हो या राजनीतिक विरोधी, यदि कोई सहायता के लिए उनके पास पहुंचे तो वे बिना भेदभाव मदद करते थे।
दिग्गी के राज में सबसे मजे में रहे विजयवर्गीय
इंदौर ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश को पता है कि जब दिग्विजय सिंह सीएम थे, तब विजयवर्गीय की उनके साथ कैसी बनती थी। इसी दौरान विजयवर्गीय इंदौर के महापौर बन गए और फिर क्या था दोनों की जुगलबंदी जम गई। दिग्गी जब भी इंदौर आते, भाजपा में रहते हुए भी दिग्विजय उनके स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ते। उस समय भाजपा में विजयवर्गीय की जादूगरी की चर्चा होती कि किस तरह दिग्गी को वश में कर रखा है। अब अंदर ही अंदर क्या समझौता हुआ था या कौन सी खिचड़ी पकी थी, किसको पता?
भाजपा के किसी सीएम से नहीं बनी
यह तो सबको पता है कि विजयवर्गीय की भाजपा के किसी भी सीएम से नहीं बनी। हां, शुरू में उमा भारती से जरूर बनी थी। बाबूलाल गौर को विजयवर्गीय ने सीएम माना ही नहीं। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के साथ उनके कैसे संबंध संबंध, रहे यह सबको पता है और वर्तमान में डॉ.मोहन यादव से उनके संबंधों की जानकारी तो दिल्ली तक को है। ऐसे में सबको इस बात का पर आश्चर्य होता है कि आखिरी विरोधी दल के सीएम से मित्रवत संबंध निभाने वाले विजयवर्गीय की अपने ही दल के मुख्यमंत्रियों से क्यों नहीं बनी?


