नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और कथित लाठीचार्ज को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने समर्थकों से माफी मांगी और प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
अभिजीत दीपके ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह अपने सभी समर्थकों से माफी मांगते हैं, विशेष रूप से उन महिलाओं से, जिन्हें उनके दावे के मुताबिक पुरुष पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर पीटा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए उन्हें और बेहतर तरीके से काम करना चाहिए था।
👉 यह भी पढ़ें:
- Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली में बढ़ा तनाव, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे
- क्या कॉकरोच जनता पार्टी में शामिल होंगे सोनम वांगचुक, सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर कह दी बड़ी बात
- कॉकरोच जनता पार्टी’ के सोशल मीडिया अकाउंट हैक, संस्थापक अभिजीत दीपके ने जारी की चेतावनी
- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने मचाया सोशल मीडिया पर तहलका, कुछ ही दिनों में लाखों लोग जुड़े
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई अमानवीय थी। दीपके ने यह भी दावा किया कि सरकार ने कुछ छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे एक केंद्रीय मंत्री को बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर कार्रवाई की।
दीपके ने घायल प्रदर्शनकारियों से उनसे सीधे संपर्क करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि वह उनसे व्यक्तिगत रूप से बात करना और माफी मांगना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी युवाओं के मुद्दों को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेगी।
CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग की
कथित लाठीचार्ज के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट से जारी पोस्ट में सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर निशाना साधा गया और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग की गई।
प्रवक्ता ने लगाया गंभीर आरोप
वहीं, पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाई गईं और कई युवाओं को चोटें आईं।
रांका ने दावा किया कि सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें ट्रक से बाहर खींचने के लिए बाल पकड़े गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर अब राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। जहां प्रदर्शनकारी और विपक्षी समूह पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
आपकी राय क्या है?
क्या प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई उचित थी? क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? और क्या सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देना चाहिए?
आप इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं और यह भी बताएं कि आपके अनुसार इस विवाद का जिम्मेदार कौन है?



