नाबालिग से रेप मामले में सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया कि वो जेल से बाहर नहीं रहेगा। फिलहाल जमानत पर बाहर चल रहे आसाराम को अब जल्द सरेंडर करना होगा।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिविजन बेंच ने आसाराम समेत तीन दोषियों की अपीलों पर फैसला सुनाया। हालांकि सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को राहत मिली है।
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यह मामला 2013 का है, जब जोधपुर के मणाई आश्रम में गुरुकुल की एक नाबालिग छात्रा के साथ यौन शोषण का आरोप लगा था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि इलाज और झाड़-फूंक के बहाने उसे आसाराम की कुटिया में भेजा गया, जहां उसके साथ अश्लील हरकतें की गईं और धमकाया गया।
मामले में दिल्ली से जीरो FIR दर्ज होने के बाद जोधपुर पुलिस ने सितंबर 2013 में इंदौर आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई बार जमानत की कोशिशें हुईं, लेकिन कोई स्थायी राहत नहीं मिली।



