पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने की तमाम कूटनीतिक कोशिशें अब तक विफल साबित हुई हैं। यह संकट अब तीसरे महीने में प्रवेश कर चुका है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट और गहरा गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। एक ओर ईरान इस अहम समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान की नाकाबंदी कर दी है।
इसी बीच ईरान ने संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग की गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवाद और ईरान पर लगी नाकाबंदी हटाने की भी बात कही गई है।
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यह प्रस्ताव अमेरिका की ओर से पहले भेजे गए नौ सूत्रीय प्रस्ताव के जवाब में आया है, जिसमें दो महीने के संघर्ष विराम का सुझाव दिया गया था। हालांकि ईरान ने अस्थायी समाधान को नकारते हुए 30 दिनों के भीतर स्थायी समाधान पर जोर दिया है।
ईरान के प्रस्ताव में सख्त सुरक्षा गारंटी शामिल हैं। इसमें भविष्य में किसी भी सैन्य हमले को रोकने की मांग के साथ-साथ अमेरिका से क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने को कहा गया है। इसके अलावा नौसैनिक प्रतिबंध हटाने, विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने और आर्थिक नुकसान की भरपाई की मांग भी शामिल है।
आर्थिक स्तर पर ईरान ने सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध पूरी तरह हटाने की मांग रखी है। वहीं क्षेत्रीय स्तर पर यह प्रस्ताव केवल ईरान-अमेरिका तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित करने की बात करता है।
इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नई प्रबंधन व्यवस्था का सुझाव भी दिया गया है, ताकि समुद्री व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। फिलहाल ईरान अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम घरीबाबादी ने पुष्टि की है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को भेजा गया है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना और दोनों देशों के बीच तनाव कम करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान कूटनीतिक वार्ता के साथ-साथ किसी भी संभावित सैन्य स्थिति के लिए भी तैयार है।
इससे पहले ईरान के प्रस्तावों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने असहमति जताई थी। उन्होंने अंतिम समझौते को लेकर संदेह व्यक्त करते हुए कहा था कि भले ही ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वह उससे संतुष्ट नहीं हैं और स्थिति पर नजर रखी जाएगी।



