टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कोर्ट ने मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को सही ठहराया

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 4 मई को मतगणना होनी है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि  इस मामले में आगे किसी आदेश की जरूरत नहीं है और चुनाव आयोग के आश्वासन को रिकॉर्ड में ले लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग केवल एक ही स्रोत यानी केंद्र सरकार से मतगणनाकर्मियों का चयन कर सकता है, इसलिए इस परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि मतगणना के दौरान टीएमसी के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे और यह परिपत्र नियमों के खिलाफ नहीं है। टीएमसी ने कोर्ट में कहा कि निर्वाचन आयोग गड़बड़ी की आशंका जता रहा है, लेकिन यह आशंका किस आधार पर है, यह स्पष्ट नहीं किया गया। पार्टी ने यह भी कहा कि 13 अप्रैल का परिपत्र होने के बावजूद उन्हें इसकी जानकारी 29 अप्रैल को मिली।

हाई कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

उल्लेखनीय है कि  तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल चुनाव की मतगणना ड्यूटी में केंद्रीय सरकारी और केंद्रीय पीएसयू कर्मचारियों की नियुक्ति के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में नई याचिका दाखिल की है। टीएमसी की नई याचिका पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले की सुनवाई के लिए दो जजों जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच का गठन किया था।

हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी टीएमसी की याचिका

इससे पहले गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज कर दी थी। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के लिए काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट के तौर पर केंद्रीय सरकारी और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम कर्मचारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया गया था। जस्टिस कृष्ण राव की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट की नियुक्ति करना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है और इस प्रक्रिया में केंद्रीय सरकारी या केंद्रीय पीएसयू कर्मचारियों की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं है।

एक कर्मचारी केंद्र या पीएसयू का

चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल को एक निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि हर मतगणना टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पीएसयू का होना अनिवार्य होगा। टीएमसी का आरोप है कि केंद्रीय कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस आशंका को खारिज करते हुए आयोग के फैसले को सही ठहराया था।

Ardhendu Bhushan
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Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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