जब भी इंदौर में हेलमेट नहीं पहनने वालों के चालान बनने लगते हैं, विरोध शुरू हो जाता है। कोर्ट से लेकर पुलिस-प्रशासन तक के पूरी ताकत लगाने के बाद भी लोग हेलमेट पहनना शुरू नहीं करते। इस साल भी पुलिस ने इंदौर में हेलमेट नहीं पहनने वालों के चालान बनाने शुरू कर दिए हैं। हर दिन काफी संख्या में चालान बन रहे हैं, लेकिन हेलमेट पहनने की बजाए लोग विरोध कर रहे हैं।
जब भी अभियान चलता है, लोग यह कहकर विरोध करने लगते हैं कि पहले सड़क के गड्ढे भरवा दो। ट्रैफिक सुधार दो। अभी तो भीषण गर्मी का हवाला दिया जा रहा है। ऐसे लोगों को कौन समझाए कि हेलमेट से न केवल आपके जानमाल की रक्षा होती है, बल्कि सर्दी, गर्मी और बरसात में आपके सिर का बचाव भी होता है। हेलमेट लगाकर आप तेज लू के थपड़े से भी बच सकते हैं और बारिश की तेज बौछार से भी आपकी रक्षा होती है।
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पुलिस और प्रशासन हर बार हेलमेट न पहनने से होनेवाली मौतों का आंकड़ा जारी करता है। इसमें साफ-साफ कहा जाता है कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में करीब 70 प्रतिशत मौतें हेलमेट न पहनने से होती हैं। पुलिस के अभियान के बीच इंदौर के एक ताजे अध्ययन की चर्चा भी की जा रही है, जिसमें कहा गया है कि इंदौर में 198 में से 164 दोपहिया वाहनों के एक्सीडेंट में मौतें हेलमेट न पहनने के कारण हुईं।
चलो एक बार के लिए मान भी लेते हैं कि पुलिस के ये आंकड़े फर्जी हैं, फिर भी इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता कि हेलमेट से सिर की सुरक्षा होती है। और अगर एक्सीडेंट में आपका सिर बच गया तो आपकी जान भी बच जाएगी।
चलो यह भी मान लिया कि इंदौर की सड़कों पर गड्ढे हैं, ट्रैफिक खराब है, तब तो आपकी जान का खतरा और बढ़ जाता है। आपके द्वारा बताए गए गड्ढों में ही कहीं आप गिर कर सिर फोड़ बैठें तो नुकसान किसका है?
अरे भाई, आप यह समझने को क्यों तैयार नहीं कि चाहे गड्ढे हों या न हों, ट्रैफिक स्लो हो या फास्ट हर हालत में हेलमेट आपकी सिर की रक्षा की करेगा।
फिर जिद क्यों? पुलिस के डंडे का इंतजार क्यों?
फैसला आपको करना है, क्योंकि सिर तो आपका ही है…


