नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के तुरंत बाद सियासी माहौल गरमा गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर जोरदार हमला बोलते हुए उनके भाषण को “राजनीतिक” करार दिया और कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकारी मंच का इस्तेमाल विपक्ष पर निशाना साधने के लिए किया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के संबोधन को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि यह भाषण “हताशा और निराशा” से भरा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में उपलब्धियां न गिना पाने के कारण प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन को विपक्ष पर “कीचड़ उछालने” का माध्यम बना दिया।
खरगे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस का दर्जनों बार जिक्र किया, जबकि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को बेहद कम महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि महिलाओं के मुद्दे सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं।
कांग्रेस ने महिला आरक्षण को लेकर भी सरकार को घेरा। पार्टी का कहना है कि वह हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है और वर्ष 2010 में राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराया था। साथ ही 2023 में लाए गए कानून का भी समर्थन किया गया। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, बिना परिसीमन से जोड़े।
कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने महिला आरक्षण और परिसीमन को एक साथ जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है। खरगे ने कहा कि इस तरह का कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और इसका उद्देश्य चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में करना है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे देश को गुमराह करना बंद करें और महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के लिए ठोस कदम उठाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को लेकर सत्ताधारी दल की रणनीति का खुलासा किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण, परिसीमन और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है, जो आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।


