राष्ट्रीय महिला आयोग की मांह पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज

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राष्ट्रीय महिला आयोग ने की टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की मांग

राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपनी अध्यक्ष रेखा शर्मा के ख़िलाफ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी जिस पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मामला दर्ज कर लिया है .समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सोशल मीडिया फ्लेटफॉर्म एक्स पर हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें दिखाया गया था कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा,उत्तर प्रदेश के हाथरस में उस जगह पहुंची हैं, जहां भगदड़ मची थी. उसी वीडियो पर महुआ मोइत्रा ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने सोशल मीडिया फ्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा है,“ये बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी है, जो एक महिला के गरिमा के अधिकार का हनन है. आयोग को लगता है कि ये टिप्पणी भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 79 का मामला है.”राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि इस टिप्पणी के लिए महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई होना चाहिए.

Abhilash Shukla (Editor)
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कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल राष्ट्र के नाम संबोधन में महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस और टीएमसी पर निशाना साधा था। आज यानी रविवार को भी पीएम मोदी ने बंगाल में फिर से टीएमसी को आड़े हाथों लिया है। इस पर अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा है कि महिला आरक्षण के नाम पर पीएम मोदी देश को भ्रमित कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिये अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने देश को सच्चाई बताने के बजाय भ्रमित करने का प्रयास किया है। उन्होंने लिखा कि महिला आरक्षण के नाम पर सियासी खेल नहीं चलेगा। ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की पक्षधर रही है और इस मुद्दे पर उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाना गलत है। ममता बनर्जी ने आंकड़ों के जरिये बताया कि लोकसभा में तृणमूल के 37.9 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं, जबकि राज्यसभा में 46 प्रतिशत महिलाओं को नामित किया गया है। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता। ममता ने  कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर सरकार अपनी राजनीतिक मंशा पूरी करना चाहती है। यह संविधान के मूल ढांचे से छेड़छाड़ और संघीय व्यवस्था पर हमला है, जिसके जरिये भाजपा शासित राज्यों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है। 2023 में बिल पास होने का किया जिक्र ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार इस मुद्दे पर गंभीर थी, तो 28 सितंबर 2023 को बिल पास होने के बाद करीब तीन साल तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया। चुनाव के बीच इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ाना और डिलिमिटेशन से जोड़ना सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें संसद के भीतर आकर देश को संबोधित करना चाहिए, जहां जवाबदेही तय होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता जरूरी है और जनता सच्चाई को समझती है। ममता ने आगे कहा कि आपने कल जो किया वह कायरतापूर्ण, पाखंडी और दोहरी चाल थी। आप महसूस कर सकते हैं कि सत्ता आपके हाथों से फिसल रही है।