वक्फ बोर्ड पर नकेल कसने में लगी सरकार, संसद में जल्द पेश होगा बिल, कम होंगे अधिकार

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नई दिल्ली। मोदी सरकार वक्फ बोर्ड पर अब नकेस कसने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार बोर्ड के उस अधिकार को कम करना चाहती है जिसके तहत वो किसी भी संपत्ति को ‘वक्फ संपत्ति‘ घोषित करके उस पर नियंत्रण कर सकता है। हाल ही में कैबिनेट ने वक्फ अधिनियम में 40 से अधिक संशोधनों पर चर्चा की। इनमें वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र की जांच करने वाले संशोधन भी शामिल हैं, जिन्हें कई लोग मनमाना मानते हैं।

पूरे देश में वक्फ बोर्ड के पास देश भर में लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत, वक्फ बोर्ड के दावों का अनिवार्य रूप से वेरिफिकेशन किया जाएगा। ऐसा ही एक अनिवार्य वेरिफिकेशन उन संपत्तियों के लिए भी प्रस्तावित किया गया है, जिनके लिए वक्फ बोर्ड और व्यक्तिगत मालिकों ने दावे और जवाबी दावे किए हैं।

बहुत जल्द संसद में पेश होगा बिल

सूत्रों ने संकेत दिया कि वक्फ अधिनियम में संशोधन करने वाला एक विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किया जा सकता है। सूत्रों ने यह भी कहा कि संपत्तियों के अनिवार्य वेरिफिकेशन के दो प्रावधान, जो वक्फ बोर्ड की मनमानी शक्तियों पर रोक लगाएंगे, अधिनियम में प्रस्तावित प्रमुख संशोधन हैं। फिलहाल इन संस्थाओं के पास किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में चिह्नित करने की शक्तियां हैं। देश भर में 8.7 लाख से अधिक संपत्तियां, कुल मिलाकर लगभग 9.4 लाख एकड़, वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में हैं।

यूपीए सरकार ने दी थी अधिक शक्तियां

2013 में यूपीए सरकार के दौरान मूल अधिनियम में संशोधन करके वक्फ बोर्ड को और अधिक व्यापक शक्तियां प्रदान की गईं। ये संशोधन वक्फ अधिकारियों, व्यक्तिगत संपत्ति मालिकों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सहित कई राज्य संस्थाओं के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण रहे हैं। इस तरह के कानून की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि मुस्लिम बुद्धिजीवियों, महिलाओं और शिया और बोहरा जैसे विभिन्न संप्रदायों के लोगों ने मौजूदा कानून में बदलाव की मांग करते हुए कई अभ्यावेदन दिए थे।

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