हे महाकाल, आपके दरबार में भक्तों से खिलवाड़…माफ कीजिएगा, ये माफ करने लायक नहीं

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उज्जैन के महाकाल मंदिर में पूरे देश से भक्त दर्शन करने आते हैं। महाकाल की एक झलक पाने के लिए लोग घंटों लाइन में धक्के खाते हैं, लेकिन सारी व्यवस्था को धत्ता बताते हुए कुछ लोग पैसे के दम पर आराम से दर्शन कर निकल जाते हैं। महाकाल मंदिर की इन व्यवस्थाओं की शिकायत काफी पुरानी है। हर बार कुछ नई व्यवस्था बनाई जाती है, लेकिन जो भी आता है महाकाल के दरबार में पाप की कमाई में जुट जाता है।

महाकाल मंदिर के कई ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिसमें कोई नकली वीआईपी गर्भगृह में दर्शन करता दिखाई देता है। इसमें से अधिकांश नेता भाजपा से ही रहते थे। इसके अलावा दूसरे जिले के अधिकारियों ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी थी। पिछले कुछ समय से ऐसे दृश्य सामने नहीं आए हैं, लेकिन फेसबुक और वॉट्सएप पर नंदीं हॉल और चौखट दर्शन करते फोटो हर दिन डाले जाते हैं। बाहर लंबी लाइन में धक्के खा रहे लोगों को चिढ़ाते ये भक्त वहां तक कैसे पहुंच जाते थे, यह पहेली सुलझ नहीं रही थी।

वो तो भला हो कलेक्टर नीरज कुमार सिंह का जिन्होंने स्वयं ही इस फर्जीवाड़े को पकड़ा। कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद इन सबकी गिरफ्तारी हुई। अब तो भष्मारती प्रभारी रितेश शर्मा ने भी सरेंडर कर दिया है।

विडंबना यह कि इस फर्जीवाड़े में सारे ऐसे लोग शामिल हैं, जो पूरे देश से हर दिन पहुंचने वाले लाखों भक्तों को सुचारू दर्शन कराने की व्यवस्था के लिए तैनात किए गए हैं। इसमें जिला प्रोटोकॉल अधिकारी अभिषेक भार्गव, महाकाल मंदिर प्रोटोकॉल प्रभारी राजेंद्र सिसोदिया, मंदिर आईटी सेल प्रभारी राजकुमार सिंह, सफाई प्रभारी राकेश श्रीवास्तव, नंदी हाल प्रभारी विनोद चौकसे और भष्मारती प्रभारी रितेश शर्मा का नाम देख किसी का भी चौंकना जायज है। जिस भस्मारती के लिए लोग तरसते हैं कि जिंदगी में एक बार बाबा महाकाल की भष्मारती देखना का अवसर मिल जाए, इस व्यवस्था के प्रभारी के ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल होना काफी दुखद है।

जिन लोगों के नाम इसमें सामने आए हैं, उससे स्पष्ट है कि यहां की पूरी व्यवस्था गड़बड़ है। जब सभी प्रभारी ही इस गोरखधंधे में शामिल हैं तो मंदिर जाने वाले भक्तों को कौन पूछ रहा? ताज्जुब तो इस बात का है कि पूर्व के कई अधिकारी यहां की व्यवस्थाओं को दुरुस्त बताते हुए अपना कॉलर ऊंचा करते रहे हैं, अगर सब सही ही था तो यह क्या है?

प्रदेश के सीएम डॉ.मोहन यादव खुद उज्जैन से हैं और महाकाल के परम भक्त भी हैं। वे यह भी मानते हैं कि महाकाल के आशीर्वाद से ही उन्हें सीएम पद पर आने का मौका मिला है। सीएम साहब को ही अब कोई स्थाई समाधान निकालना होगा। फिर कर्मचारी और प्रभारी बदल देंगे, कुछ दिनों तक सही रहेगा, फिर सबकुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगेगा।

सीएम साहब, आपसे निवेदन है कि महाकाल के नाम पर हो रहे इस फर्जीवाड़े को हर हाल में रोकिए। और यह भी पता लगाइए कि किसकी शह पर इतना बड़ा रैकेट संचालित होने लगा था।

दोषियों को सजा देना जरूरी है…यह अपने मध्यप्रदेश की प्रतिष्ठा का सवाल है…

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