महाकुंभ में भगदड़ पर यूपी सरकार ने तोड़ी चुप्पी, 30 लोगों की मौत का दिया आंकड़ा, 1954 में मौनी अमावस्या पर ही 800 लोगों की गई थी जान

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प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ में मंगलवार देर रात मची भगदड़ पर यूपी सरकार दिन भर यह कहती रही कि इसमें कुछ लोग घायल हुए हैं। मीडिया में कभी 15, कभी 17 मौतों की खबर आती रही, लेकिन सरकार की तरफ से कोई अधिकृत बयान नहीं जारी किया जा रहा था। बुध‌वार देर शाम महाकुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद और डीआईजी कुंभ वैभव कृष्ण ने प्रेस कान्फ्रेंस कर कहा कि 30 लोगों की मौत हुई है।

डीआईजी ने बताया कि रात एक से डेढ़ बजे के बीच अचानक बैरीकेडिंग टूटने के बाद लोग फांदकर दूसरी ओर जाने लगे। दूसरी ओर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का इंतजार करने के पहले सो रहे लोगों को कुचलते चले गए। इस दुर्घटना में 90 लोग घायल हुए, जिनमें से 30 की मौत हो गई। इनमें से 25 मृतकों की पहचान हो गई है। कुंभ मेला प्रशासन की ओर से साफ किया गया कि महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के दिन किसी भी तरह का कोई प्रोटोकॉल जारी नहीं किया गया था। मरने वालों में चार लोग कर्नाटक, एक असम और एक गुजरात का बताया जा रहा है। प्रशासन ने मृतकों और घायलों की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1920 जारी किया है।

50 से अधिक एम्बुलेंस से बचाई जान

कुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि भगदड़ के तुरंत बाद ही राहत एवं बचाव कार्य किया गया। कुछ ही देर में हालात काबू में कर लिए गए। भारी भीड़ के बावजूद ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 50 से अधिक एंबुलेंस मौके पर पहुंचाई गईं। लोगों की जान बचाने के लिए एंबुलेंस ने 100 से अधिक फेरे लगाए। दो से तीन मिनट के भीतर एक्सपर्ट डॉक्टर पहुंचे। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस टीम भी चिकित्सकों के साथ घायलों की मदद में जुटी रहीं। घटनास्थल पर प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर मरीजों को सेंट्रल हॉस्पिटल लाया गया। गंभीर रूप से घायल मरीजों को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल और तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय भेजा गया।

1954 में 800 श्रद्धालुओं की हुई थी मौत

3 फरवरी 1954 को इलाहाबाद यानी प्रयागराज में कुंभ मेले में मौनी अमावस्या के दिन ही ऐसी भगदड़ मची थी। इसमें 800 लोगों की मौत हो गई थी। 1954 में कुंभ के दौरान 2 और 3 फरवरी की दरमियानी रात को गंगा में अचानक बहुत पानी बढ़ गया। संगम किनारे साधु-संतों के आश्रम में पानी पहुंचने लगा। इस घटना से लोग घबरा गए। इससे अफरा-तफरी में भगदड़ मच गई। आजादी के बाद लगे इस कुंभ मेले में मेले में करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था।

इन कुंभों में भी मची थी भगदड़

कुंभ में सबसे पहली भगदड़ 1954 में मची थी, जिसमें 800 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 1992 में उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान मची भगदड़ के दौरान 50 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। महाराष्ट्र के नासिक में 2003 के कुंभ मेले के दौरान 27 अगस्त को भगदड़ मच गई थी, इसमें 39 लोगों की मौत हो गई थी। उत्तराखंड के हरिद्वार में 2010 में कुंभ मेले के दौरान 14 अप्रैल को भगदड़ मची, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह प्रयागराज में 2013 में आयोजित कुंभ मेले में मौनी अमावस्या पर 10 फरवरी को अमृत स्नान के दौरान रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 36 लोगों की मौत हो गई थी।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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