सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन खरीदी में एक और फर्जीवाड़ा उजागर, पिंटू छाबड़ा ने गलत तरीके से सहकारिता विभाग से ली थी एनओसी

Date:

इंदौर। मॉल मालिक पिंटू छाबड़ा ने सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन खरीदने के लिए सारे विभागों की फर्जी अनुमतियों का इस्तेमाल किया है। आईडीए की जिस एनओसी का जिक्र रजिस्ट्री में किया गया है, वह तो आईडीए के किसी रिकॉर्ड में ही नहीं है। सहकारिता विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि पिंटू छाबड़ा ने यहां भी डीआर से गलत तरीके से अनुमति ले ली। डीआर को किसी प्राइवेट व्यक्ति को एनओसी देने का अधिकार ही नहीं है। अब इस मामले की जांच भी चल रही है।

उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय के आदेश पर तृष्णा गृह निर्माण संस्था के फर्जीवाड़े की जांच सहकारिता विभाग कर रहा है। इसमें पता चला है कि जमीन की रजिस्ट्री गलत तरीके से कराई गई थी। जिस तृष्णा गृह निर्माण संस्था ने जमीन बेची, उसका पंजीयन भी निरस्त हो चुका है। वह भी उस समय जब पंजीयन निरस्त करने पर रोक था। इसके साथ ही सहकारिता विभाग की जांच में कई अन्य तथ्य भी सामने आए हैं। इसके आधार पर अब आगे की जांच चल रही है।

डीआर पाटनकर इस खेल में छाबड़ा के साथ

सूत्र बताते हैं कि जांच में यह भी पता चला है कि तत्कालीन डीआर के. पाटनकर इस पूरे खेल में पिंटू छाबड़ा के साथ थे। पाटनकर ने जिस समय तृष्णा गृह निर्माण संस्था का निलंबन निरस्त किया, उस समय सरकार का आदेश था किसी भी संस्था को डिजॉल्व नहीं किया जाए। इसके बावजूद तृष्णा को डिजॉल्व कर दिया गया। इतना ही नहीं इसके ऑडिट नोट भी गायब हो गए। ऑडिट नोट नहीं मिलने पर सहकारिता विभाग ने पाटनकर से इस संबंध में पत्र लिखकर पूछा भी है। इसके बाद पाटनकर ने ही पिंटू छाबड़ा को गलत तरीके से एनओसी का पत्र दे दिया।

डीआर की अनुमति की जांच करेगा सहकारिता विभाग

चूंकि डीआर किसी प्राइवेट पार्टी को अनुमति या एनओसी दे ही नहीं सकते, इसलिए अब पाटनकर की भूमिका संदिग्ध हो गई है। सहकारिता विभाग के सूत्र बताते हैं कि इस मामले में पाटनकर की भूमिका की जांच भी शुरू हो गई है। उनसे पूछा जाएगा कि जब जमीन तृष्णा गृह निर्माण संस्था की थी तो उन्होंने नियम विरुद्ध बेबीलोन यानी पिंटू छाबड़ा को एनओसी कैसे जारी कर दी। क्योंकि, पाटनकर की जिम्मेदारी सहकारी संस्थाओं के प्रति है न कि प्राइवेट लोगों या संस्थाओं के प्रति।

आईडीए के पास तो एनओसी का कोई रिकॉर्ड ही नहीं

सी-21 बिजनेस पार्क जिस जमीन पर बना है, वह तृष्णा गृह निर्माण से बेबीलोन इंफ्रस्टाक्चर ने खरीदी थी, जिसके वर्तमान कर्ताधर्ता पिंटू छाबड़ा है। इस जमीन की पांच रजिस्ट्री है। इसकी चार रजिस्ट्री पर आईडीए के 21 दिसंबर 1998 के पत्र क्रमांक 1700 का जिक्र किया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि यह जमीन आईडीए के किसी योजना में नहीं है। इसी तरह एक रजिस्ट्री में 20 अक्टूबर 2005 के आईडीए के पत्र क्रमांक 6864 का जिक्र किया गया है, जिसमें उल्लेख है कि यह जमीन आईडीए के किसी स्कीम में नहीं है। जब आईडीए के अधिकारियों से उपरोक्त दोनों पत्रों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। जब सूचना के अधिकार के तहत आईडीए से जानकारी मांगी गई तो आईडीए ने इस तरह के किसी पत्र का कोई रिकॉर्ड होने से लिखित में मना कर दिया।

पाटनकर को फिर इंदौर लाने की तैयारी

जिस डीआर के. पाटनकर ने पिंटू छाबड़ा के इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम तक पहुंचाया, उन्हें फिर से इंदौर लाने की तैयारी चल रही है। पाटनकर फिलहाल उज्जैन में पदस्थ हैं और इंदौर के कई भूमाफियों के खास रहे हैं। तृष्णा गृह निर्माण संस्था की फाइल खुलने के बाद इंदौर के भूमाफियाओं का दावा है कि पाटनकर जल्द ही इंदौर आ जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि भूमाफिया यह दावा कर रहे हैं कि इसके लिए विभागीय मंत्री तथा सहकारिता विभाग भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों से बात भी हो चुकी है। अगर पाटनकर इंदौर आ गए तो तृष्णा गृह निर्माण संस्था और सी-21 बिजनेस पार्क के फर्जीवाड़े की जांच भ्रष्टाचार की आंच में जल जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

इंदौर। डेली कॉलेज के संविधान बदलने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बताया जाता है कि डीसी बोर्ड ने बाले-बाले संविधान बदलकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी शिकायत लेकर ओल्ड डेलियंस कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंचे। कलेक्टर ने एडीएम पवार नवजीवन विजय को इसकी जांच सौंपी है। ओल्ड डेलियंस ने मंगलवार को कलेक्टर शिवम वर्मा को एक प्रतिवेदन सौंपा। इसमें कहा गया है कि  डेली कॉलेज सोसायटी द्वारा अपंजीकृत एवं अप्रस्वीकृत संशोधनों के आधार पर अवैध रूप से चुनाव कराए जा रहे हैं।   प्रतिवेदन में कहा गया है सोसायटी का मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन तथा नियम/विनियम, जो 08 अप्रैल 1954 को निर्मित हुए थे और आज भी लागू हैं। यह स्पष्ट रूप से  निर्धारित करते हैं कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किस प्रकार होगा तथा उसके चुनाव किस प्रकार संपन्न किए जाएंगे। प्रतिवेदन में कहा गया है कि नियम के अनुसार नए बोर्ड के चुनाव की प्रक्रिया बोर्ड की अवधि समाप्त होने से कम से कम 90 दिन पूर्व अर्थात 12 सितंबर 2025 तक प्रारंभ हो जानी चाहिए, जो नहीं हए। सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं हुए संशोधन प्रतिवेदन में कहा गया है कि मध्यप्रदेश   सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1973 की धारा 10 के अनुसार, “प्रस्तावित” संशोधन केवल तभी प्रभाव में आ सकते हैं जब उन्हें रजिस्ट्रार/सहायक रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण के माध्यम से अनुमोदित किया जाए। डेली कॉलेज के प्रस्तावित संशोधन दिनांक 5 मार्च 26, जिसे 9 अप्रैल 26 को प्रस्तुत किया गया, अभी तक सरकार द्वारा “अनुमोदित” नहीं किए गए हैं। ऐसी स्थिति में इन अप्रमाणित संशोधनों के आधार पर चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं? इससे पहले संशोधन नहीं करने के हुए थे आदेश प्रतिवेदन में कहा गया है कि ऐसे संशोधनों को किसी भी स्थिति में अनुमोदित नहीं भी किया जा सकता, क्योंकि रजिस्ट्रार के दिनांक 10.11.25 के आदेश के अनुसार, डेली कॉलेज बैठकों का आयोजन तो कर सकता है, परंतु कोई “संशोधन” नहीं कर सकता, जब तक भोपाल स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में उनके अपीलों के सुनवाई नहीं हो जाती। डेली कॉलेज ने इस सारे तथ्यों को छुपाया है। कलेक्टर ने एडीएम से तुरंत जांच को कहा ओल्ड डेलियंस के प्रतिवेदन पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने एडीएम पवार नवजीवन विजय को तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी पिछले वर्ष जब कलेक्टर के पास संविधान संशोधन की शिकायत पहुंची थी तो उन्होंने उप रजिस्ट्रार को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद उप रजिस्ट्रार ने डेली कॉलेज को आदेश दिया था कि जब भोपाल में रजिस्ट्रार के यहां लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक संविधान संशोधन नहीं किया जाए।